पूरे देश में, अस्सी लाख से भी अधिक श्रमिक भवन एवं अन्य संनिर्माण कार्यों में संलग्न हैं। यह श्रमिक वर्ग, भारत के असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के सबसे संवेदनशील वर्गों में से एक है। उनका कार्य अस्थायी प्रकृति का है, नियोक्ता और कर्मचारी के बीच संबंध अस्थायी है, कार्य का समय अनिश्चित है। इन श्रमिकों को मिलने वाली बुनियादी जरूरतें व कल्याण सुविधाएं अपर्याप्त हैं। जीवन और अंग का खतरा भी निहित है। अब तक पर्याप्त वैधानिक प्रावधानों के अभाव में, दुर्घटनाओं की संख्या और प्रकृति के बारे में अपेक्षित जानकारी प्राप्त करना काफी मुश्किल था और इसके कारण उत्तरदायित्व तय करने या सुधारात्मक उपाय करने का काम आसान नहीं था। यद्यपि कुछ केन्द्रीय अधिनियमों के प्रावधान, भवन व अन्य संनिर्माण श्रमिकों के लिए लागू थे फिर भी इन कर्मचारियों की सुरक्षा, कल्याण और सेवा की अन्य शर्तों को विनियमित करने के लिए एक व्यापक केन्द्रीय कानून की आवश्यकता महसूस की गयी। 18 मई 1995 को आयोजित 41 वें श्रम मंत्रियों के सम्मेलन के निर्णय के अनुपालन में, राज्य श्रम मंत्रियों की समिति ने इस विषय पर केन्द्रीय कानून के लिए अपनी आम सहमति व्यक्त की थी। भवन एवं अन्य संनिर्माण श्रमिकों के रोजगार व सेवा की शर्तों को विनियमित करने और उनकी सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण के लिए उपाय करने के उद्देश्य से 3 नवंबर 1995 को, संसद के सत्र में न होने के कारण, राष्ट्रपति द्वारा भवन एवं अन्य संनिर्माण श्रमिक (रोजगार एवं सेवा की शर्तों का विनियमन) अध्यादेश, 1995 (1995 का अध्यादेश 14) लागू किया गया। इस अध्यादेश को प्रतिस्थापित करने के लिए, 1 दिसंबर 1995 को लोकसभा में एक विधेयक पेश किया गया। चूंकि विधेयक पर विचार नहीं किया जा सका जिसके कारण यह व्यपगत हो गया। 5 जनवरी 1996 को, राष्ट्रपति ने भवन एवं अन्य संनिर्माण श्रमिक (रोजगार एवं सेवा शर्तों का विनियमन) अध्यादेश, 1996 (1996 का अध्यादेश 3) प्रख्यापित किया। इस अध्यादेश को प्रतिस्थापित करने के लिए एक विधेयक संसद में पेश किया गया जो पारित नहीं किया जा सका और राष्ट्रपति ने 27 मार्च 1996 को भवन एवं अन्य संनिर्माण श्रमिक (रोजगार एवं सेवा शर्तों का विनियमन) दूसरा अध्यादेश, 1996 (1996 का अध्यादेश 15) प्रख्यापित किया। जैसा कि यह अध्यादेश संसद के अधिनियम द्वारा प्रतिस्थापित नहीं किया जा सका, राष्ट्रपति ने 20 जून 1996 को भवन एवं अन्य संनिर्माण श्रमिक (रोजगार एवं सेवा शर्तों का विनियमन) तीसरा अध्यादेश, 1996 (1996 का अध्यादेश 25) प्रख्यापित किया। इस अध्यादेश को प्रतिस्थापित करने के क्रम में भवन एवं अन्य संनिर्माण श्रमिक (रोजगार एवं सेवा शर्तों का विनियमन) विधेयक संसद में पेश किया गया।
उद्देश्य एवं कारण
- यह अनुमानित है कि देश में लगभग 85 लाख श्रमिक भवन एवं अन्य संनिर्माण कार्यों में संलग्न हैं। भवन एवं अन्य संनिर्माण श्रमिक भारत में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के सबसे संवेदनशील वर्गों में से एक हैं जिनकी संख्या काफी अधिक है। श्रमिकों के जीवन व उनके अंगों के लिए निहित जोखिम भवन एवं अन्य संनिर्माण कार्यों की विशेषता है। आकस्मिक प्रकृति, नियोक्ता और कर्मचारी के बीच अस्थायी संबंध, अनिश्चित कार्य समय, बुनियादी सुविधाओं का अभाव और कल्याणकारी सुविधाओं की अपर्याप्तता भी इस प्रकार के कार्यों की विशेषता है। अपर्याप्त वैधानिक प्रावधानों के अभाव में, दुर्घटनाओं की संख्या और प्रकृति के बारे में अपेक्षित जानकारी भी सामने नहीं आ पाती है। इस प्रकार की जानकारी के अभाव में, जिम्मेदारी तय करना या कोई सुधारात्मक कार्रवाई करना मुश्किल होता है।
- यद्यपि कुछ केन्द्रीय अधिनियमों के प्रावधान, भवन व अन्य संनिर्माण श्रमिकों के लिए लागू थे फिर भी इन कर्मचारियों की सुरक्षा, कल्याण और सेवा की अन्य शर्तों को विनियमित करने के लिए एक व्यापक केन्द्रीय कानून की आवश्यकता महसूस की गयी। राज्य सरकारों और संघ राज्य क्षेत्र प्रशासनों से परामर्श किए जाने पर उनमें से अधिकतर ने एक ऐसे कानून का पक्ष लिया। इसके अलावा, 18 मई 1995 को निवर्तमान केंद्रीय श्रम मंत्री की अध्यक्षता में आयोजित 41 वें श्रम मंत्रियों के सम्मेलन के निर्णय के अनुपालन में गठित राज्य श्रम मंत्रियों की समिति की एक बैठक में इस विषय पर केन्द्रीय कानून के लिए अपनी आम सहमति व्यक्त की थी।
- उपरोक्त वर्णित परिस्थितियों को देखते हुए, भवन एवं अन्य संनिर्माण श्रमिकों के लाभ के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और कल्याणकारी उपायों को प्रदान करने और नजर रखने के लिए प्रत्येक राज्य में कल्याण बोर्ड का गठन करना आवश्यक है।उपरोक्त प्रयोजन के लिए, 5 दिसंबर, 1988 को राज्य सभा में पेश किये गये भवन एवं अन्य संनिर्माण श्रमिक (रोजगार एवं सेवा शर्तों का विनियमन) विधेयक, 1988 के प्रावधानों को परिवर्धित करते हुए एक व्यापक कानून लाना उपयुक्त है। सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और कल्याणकारी उपायों को क्रियान्वित करने के लिए, कल्याण बोर्ड के लिए पर्याप्त धन सुनिश्चित करने हेतु भवन एवं अन्य संनिर्माण कार्यों पर नियोक्ताओं द्वारा वहन की गई संनिर्माण लागत पर उपकर लगाना आवश्यक है।
- जैसा कि संसद सत्र में नहीं थी और लम्बे समय से उक्त कानून की मांग को पूरा करने के लिए सरकार द्वारा महसूस की जाने वाला तात्कालिकता को देखते हुए, राष्ट्रपति ने भवन एवं अन्य संनिर्माण श्रमिक (रोजगार एवं सेवा की शर्तों का विनियमन) अध्यादेश 1995 (1995 का अध्यादेश 14) के साथ 3 नवम्बर 1995 को उपकर लगाने के लिए एक और अध्यादेश प्रख्यापित किया।
- संसद के अधिनियम द्वारा उक्त अध्यादेश को प्रतिस्थिपत करने के लिए भवन एवं अन्य संनिर्माण श्रमिक (रोजगार एवं सेवा की शर्तों का विनियमन) विधेयक, 1995 लोकसभा में 1 दिसंबर 1995 को पेश किया गया था। चूंकि लोकसभा के 1995 के शीतकालीन सत्र और 1996 के बजट सत्र में इस विधेयक पर विचार नहीं किया जा सका, इसलिए विधायी संरक्षण को निरंतर प्रभावी बनाए रखने के उद्देश्य से भवन एवं अन्य संनिर्माण श्रमिक (रोजगार और सेवा की शर्तों का विनियमन) अध्यादेश, 1996 और भवन एवं अन्य संनिर्माण श्रमिक (रोजगार और सेवा की शर्तों का विनियमन) दूसरा अध्यादेश, 1996 (1996 का अध्यादेश 15) क्रमशः 5 जनवरी, 1996 और 27 मार्च 1996 को प्रख्यापित किये गये। 10 वीं लोकसभा के विघटन के साथ ही, भवन एवं अन्य संनिर्माण श्रमिक (रोजगार एवं सेवा शर्तों का विनियमन) विधेयक-1995 व्यपगत हो गया। संविधान के अनुच्छेद 123 (2) (d) के उपबंधों के आधार पर, 27 मार्च 1996 को प्रख्यापित भवन एवं अन्य संनिर्माण श्रमिक (रोजगार एवं सेवा शर्तों का विनियमन) दूसरा अध्यादेश भी, 4 जुलाई 1996 के प्रभाव से निष्प्रभावी हो गया। इस मुद्दे की तात्कालिकता और जैसाकि संसद सत्र में नहीं थी, इसके लिए विधायी संरक्षण को निरंतर प्रभावी बनाए रखने के उद्देश्य से, राष्ट्रपति ने 10 जून 1996 को भवन एवं अन्य संनिर्माण श्रमिक (रोजगार एवं सेवा शर्तों का विनियमन) तीसरा अध्यादेश 1996 (1996 का अध्यादेश 25) प्रख्यापित किया।
- भवन एवं अन्य संनिर्माण श्रमिक (रोजगार एवं सेवा की शर्तों का विनियमन), तीसरा अध्यादेश, 1996, अन्य बातों के साथ निम्नलिखित प्रावधान करता हैः
-
- उस प्रत्येक प्रतिष्ठान को समाहित करने का प्रावधान जो किसी भी भवन या अन्य संनिर्माण कार्य में वर्तमान में या पिछले बारह महीनों में किसी भी दिन पचास या अधिक श्रमिक नियोजित करता है
- विभिन्न प्रतिष्ठानों के संबंध में ष्समुचित सरकारश् को परिभाषित करना और अधिसूचित करने के लिए केन्द्र सरकार को सक्षम बनाना और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम जिनके संबंध में केन्द्र सरकार समुचित सरकार होगी
- उक्त अध्यादेश के प्रशासन से उत्पन्न मामलों पर समुचित सरकार को सलाह देने के लिए केन्द्र और राज्य सलाहकार समिति का गठन;
- समुचित सरकार द्वारा नियम बनाने से संबंधित मामलों पर सलाह देने के लिए विशेषज्ञ समिति का गठन।
- संनिर्माण श्रमिकों को नियोजित करने वाले प्रतिष्ठानों का पंजीकरण, और पंजीकरण अधिकारियों की नियुक्ति;
- उक्त अध्यादेश के तहत लाभार्थियों के रूप में संनिर्माण श्रमिकों का पंजीकरण और उनके पहचान कार्ड आदि, के लिए प्रावधान
- राज्य सरकारों द्वारा कल्याण बोर्डों का गठन और कोष के तहत लाभार्थियों का पंजीकरण
- राज्य सरकारों द्वारा गठित कल्याण बोर्ड के संसाधनों के वित्तीयन व संवर्धन के लिए प्रावधान
- भवन संनिर्माण श्रमिकों के लिए सामान्य कार्य दिवस का कार्य समय नियत करना, साप्ताहिक व सवैतनिक विश्राम दिवस, अधिक समय के लिए मजदूरी, बुनियादी कल्याण सुविधाएंरू जैसे पीने का पानी, शौचालय और मूत्रालय, शिशु गृह, प्राथमिक चिकित्सा, कैंटीन आदि का प्रावधान करना
- सभी संनिर्माण श्रमिकों के लिए कार्य स्थल पर या आसपास अस्थायी आवास का प्रावधान
- सुरक्षा समितियों व सुरक्षा अधिकारियों की नियुक्ति और दुर्घटनाओं को अनिवार्य रूप से अधिसूचित करने के प्रावधान सहित संनिर्माण श्रमिकों के लिए सुरक्षा और स्वास्थ्य उपायों के लिए पर्याप्त प्रावधान करना;
- राज्य स्तर पर महानिरीक्षक और केन्द्रीय स्तर पर निरीक्षण महानिदेशक की अध्यक्षता में सुरक्षा उपायों के लिए मॉडल नियम बनाने हेतु केन्द्र सरकार को सशक्त बनाना;
- केन्द्रीय स्तर पर निरीक्षण महानिदेशक और राज्य स्तर पर महानिरीक्षक सहित निरीक्षण स्टाफ की नियुक्ति के लिए प्रावधान;
- सुरक्षा प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित करने और दुर्घटनाओं की रोकथाम, मजदूरी का समय पर भुगतान आदि के संबंध में नियोक्ताओं का उत्तरदायित्व तय करने के संबंध में विशेष उपबंध
- इस विधेयक के तहत दंडनीय अपराध को अदालत द्वारा संज्ञान में लेनेय सद्भावना के साथ की गई कार्यवाही को संरक्षण प्रदान करनेय उल्लंघन, अवरोध, अतिक्रमण व अपराध के लिए, अर्थ दंड का प्रावधान
- भवन एवं अन्य संनिर्माण श्रमिकों के लिए कर्मकार प्रतिकर अधिनियम, 1923 लागू करना; और
- राज्यों को निर्देश देने और उक्त अध्यादेश के प्रावधानों को प्रभावी बनाने में उत्पन्न होने वाली कठिनाइयों को दूर करने के लिए केन्द्र सरकार को सशक्त बनाना।
- यह विधेयक भवन एवं अन्य संनिर्माण श्रमिक ;रोजगार एवं सेवा शर्तों का विनियमनद्ध तीसरा अध्यादेश, 1996 को प्रतिस्थापित करेगा।
1996 का अधिनियम 27
भवन एवं अन्य संनिर्माण श्रमिक (रोजगार एवं सेवा शर्तों का विनियमन) विधेयक संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित किया गया और 19 अगस्त 1996 को राष्ट्रपति ने अपनी स्वीकृति प्रदान की। कानून की पुस्तकों में यह भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार (नियोजन तथा सेवा शर्तों का विनियमन) अधिनियम, 1996 (1996 का 27) के रूप में प्रकाशित हुआ।
(1) लघु शीर्षक, सीमा, प्रारंभ और लागू होना -
- इस अधिनियम को भवन एवं अन्य संनिर्माण श्रमिक (रोजगार एवं सेवा शर्तों का विनियमन) अधिनियम, 1996 कहा जायेगा।
- इसका विस्तार सम्पूर्ण भारत है।
- इसे मार्च, 1996 के प्रथम दिन से अस्तित्व में समझा जाएगा।
- यह, उस प्रत्येक प्रतिष्ठान पर लागू होगा जिसने किसी भी भवन या अन्य संनिर्माण कार्य में वर्तमान में या पिछले बारह महीनों में किसी भी दिन दस या अधिक श्रमिकों को नियोजित किया हो;
स्पष्टीकरण - इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, नियोक्ता द्वारा या ठेकेदार द्वारा नियोजित एक दिन में अलग रिले में कार्यरत संनिर्माण श्रमिकों को प्रतिष्ठान में कार्यरत संनिर्माण श्रमिकों की संख्या की गणना में शामिल किया जायेगा।
इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो -
- ‘समुचित सरकार’, से अभिप्रेत है, -
- एक प्रतिष्ठान के संबंध में जो प्रत्यक्ष रूप से या एक ठेकेदार के माध्यम से संनिर्माण श्रमिकों को नियोजित करता है, जिसके संबंध में औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) के तहत समुचित सरकार केंद्र सरकार है;
- किसी भी ऐसे प्रतिष्ठान के संबंध में, जैसा कि केंद्र सरकार समय-समय पर अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट करे एक सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम, जो या तो प्रत्यक्ष तौर पर या किसी ठेकेदार के माध्यम से संनिर्माण श्रमिकों को नियोजित करे, के लिए केन्द्र सरकार।
स्पष्टीकरण- उपखंड ;पपद्ध के प्रयोजनों के लिए, केंद्र, राज्य या प्रांतीय अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित किसी निगम या कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1), की धारा 617 में कंपनी के रूप में परिभाषित केन्द्र सरकार द्वारा स्वामित्व, नियंत्रित या प्रबंधित सरकारी कंपनी को ‘सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम’ समझा जायेगा;
- किसी अन्य प्रतिष्ठान के संबंध में जो या तो प्रत्यक्ष तौर पर या किसी ठेकेदार के माध्यम से संनिर्माण श्रमिकों को नियोजित करता है, के संबंध में, उस राज्य की सरकार से अभिप्रेत है, जिसमें वह प्रतिष्ठान स्थित है;
- लाभार्थी से धारा 12 के तहत पंजीकृत एक संनिर्माण श्रमिक अभिप्रेत है;
- बोर्ड से, धारा 18 की उप-धारा (1) के अधीन गठित भवन एवं अन्य संनिर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड, अभिप्रेत है;
- भवन संनिर्माण या अन्य संनिर्माण कार्य से ‘संनिर्माण, परिवर्तन, मरम्मत, रखरखाव या विध्वंस या, भवनों, गलियों, सड़कों, रेलवे, ट्रैमवे, हवाई अड्डे, सिंचाई, जल निकासी, तटबंध और नौवहन संनिर्माण, बाढ़ (वर्षा जल निकास संनिर्माण सहित) नियंत्रण संनिर्माण, उत्पादन, पारेषण और विद्युत वितरण, पानी संनिर्माण (पानी के वितरण के लिए चैनलों सहित), तेल और गैस प्रतिष्ठान, बिजली लाइन, वायरलेस, रेडियो, टेलीविजन, टेलीफोन, टेलीग्राफ और विदेशी संचार बांध, नहर, जलाशयों, जलमार्गों, सुरंगों, पुल, मार्ग सेतु, जलसेतु, पाइपलाइनों, टावरों, शीतलक टावरों, पारेषण टावरों और इस तरह के अन्य कार्य अभिप्रेत हैं जो समुचित सरकार द्वारा इस संबंध में अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट किये जा सकते हैं परंतु इसमें कारखाना अधिनियम, 1948 (1948 का 63), या खान अधिनियम, 1952 (1952 का 35) के प्रावधानों के अंतर्गत कोई इमारत या अन्य संनिर्माण कार्य शामिल नहीं है;
- भवन संनिर्माण श्रमिक से, किसी भी भवन या अन्य संनिर्माण के संबंध में, रोजगार के संबंध में व्यक्त या निहित, चाहे किराये पर या पुरस्कार के लिए कोई भी, कुशल, अर्धकुशल या अकुशल, पर्यवेक्षी तकनीकी या लिपिकीय कार्य करने के लिए कार्यरत एक व्यक्ति अभिप्रेत है, लेकिन यह किसी भी ऐसे व्यक्ति को शामिल नहीं करता जो -
- मुख्यतः एक प्रबंधकीय या प्रशासनिक क्षमता में नियोजित है; या
- एक पर्यवेक्षी क्षमता में नियोजित है, जो या तो कार्यालय से जुड़े कर्तव्यों के स्वभाव के कारण या मुख्य रूप से उसमें निहित शक्तियों या प्रबंधकीय प्रकृति के कार्यों के कारण, प्रति माह या प्रति कार्य के अनुसार वह सोलह सौ रुपए से अधिक मजदूरी प्राप्त करता है;
- ‘मुख्य निरीक्षक’ से धारा 42 की उप-धारा (2) के तहत नियुक्त भवन और संनिर्माण निरीक्षण मुख्य निरीक्षक अभिप्रेत है।
- ‘ठेकेदार’ से किसी भी प्रतिष्ठान के कार्य के लिए वांछित परिणाम देने वाले व्यक्ति से अभिप्रेत है जो मात्र वस्तुओं या संनिर्माण समाग्रियों की आपूर्ति के अलावा संनिर्माण कर्मकारों की आपूर्ति भी करता है या जो किसी भी प्रतिष्ठान के किसी भी कार्य के लिए संनिर्माण श्रमिकों की आपूर्ति करता है, जिसमें उप ठेकेदार शामिल हैं;
- ‘महानिदेशक’ से धारा 42 की उप-धारा (1) के तहत नियुक्त निरीक्षण महानिदेशक अभिप्रेत है
- किसी प्रतिष्ठान के संबंध में, नियोक्ता से, उसका मालिक अभिप्रेत है, और इसमें निम्न शामिल हैं -
- सरकार के किसी भी विभाग द्वारा किसी ठेकेदार के बिना सीधे किए जाने वाले कार्य के संबंध में प्राधिकार के तहत किया जाने वाला, कोई भवन या अन्य संनिर्माण कार्य तथा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट प्राधिकारी, या जहां कोई अधिकारी निर्दिष्ट नहीं किया जाता है, विभाग का प्रमुख;
- किसी भी स्थानीय प्राधिकरण या अन्य प्रतिष्ठान द्वारा किसी ठेकेदार के बिना सीधे किये जाने वाले, किसी भवन या अन्य संनिर्माण कार्य के संबंध में उस प्राधिकरण या प्रतिष्ठान का मुख्य कार्यकारी अधिकारी;
- एक ठेकेदार के माध्यम से, ठेकेदार द्वारा आपूर्ति किए जाने वाले भवन श्रमिकों के नियोजन के द्वारा किए गए किसी भवन या अन्य संनिर्माण कार्य के संबंध में एक ठेकेदार;
- प्रतिष्ठान, ऐसे प्रतिष्ठान जो, सरकार के स्वामित्व या उसके नियंत्रण के अधीन, या किसी निकाय, कंपनी या फर्म, किसी संघ या व्यक्तियों के किसी अन्य संगठन से अभप्रेत है जो भवन या अन्य संनिर्माण कार्य में संनिर्माण श्रमिकों को नियोजित करते हैंय और इसमें ठेकेदार से संबंधित एक प्रतिष्ठान भी शामिल है, लेकिन अपने निवास के लिए किसी भवन या संनिर्माण कार्य में ऐसे श्रमिकों को नियोजित करने वाले व्यक्ति शामिल नहीं हैं जिस संनिर्माण की कुल लागत दस लाख रुपए से अधिक नहीं है;
- ‘कोष’ से, धारा 24 की उप-धारा (1) के तहत गठित एक बोर्ड के भवन एवं अन्य संनिर्माण श्रमिक कल्याण कोष, अभिप्रेत है;
- अधिसूचना से, राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना, अभिप्रेत है;
- विहित से, केन्द्र सरकार या, जैसी भी स्थिति हो, राज्य सरकार द्वारा इस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा विहित, अभिप्रेत है;
- मजदूरी का अर्थ वही होगा जो मजदूरी भुगतान अधिनियम, 1936 ;1936 का 4द्ध की धारा 2 के खंड (अप) में है।
(2)कोई भी कानून जो किसी भी क्षेत्र में लागू नहीं है का इस अधिनियम में कोई भी संदर्भ, उस क्षेत्र के संदर्भ में, जिसमें वह लागू है, यदि कोई है, वही होगा जैसा कि, संगत कानून के संदर्भ में लगाया गया है।
सलाहकार समितियां और विशेषज्ञ समितियां
(3) केंद्रीय सलाहकार समिति -
- केन्द्र सरकार, जितनी जल्दी संभव हो सके, इस अधिनियम के प्रशासन से उत्पन्न होने वाले इस तरह के मामलों पर या अन्य मामले जो उसे संदर्भित किए जा सकते हैं, पर केंद्र सरकार को सलाह देने के लिए एक समिति का गठन करेगी जिसे केंद्रीय भवन एवं संनिर्माण श्रमिक सलाहकार समिति (जिसे इसके पश्चात केंद्रीय सलाहकार समिति कहा गया है) कहा जायेगा।
- केन्द्रीय सलाहकार समिति में निम्नलिखित शामिल होगें -
- एक अध्यक्ष, जो केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किया जायेगा;
- संसद के तीन सदस्य जिसमें से दो लोक सभा द्वारा निर्वाचित और एक राज्य सभा द्वारा निर्वाचित किए जाएगें;
- महानिदेशकः पदेन सदस्य
- ऐसी संख्या में अन्य सदस्य जो तेरह से अनधिक परंतु नौ से कम नहीं होगें, जैसा कि केन्द्र सरकार नियोक्ताओं, भवन संनिर्माण कर्मकारों, वास्तुकार संगठनों, इंजीनियरों, दुर्घटना बीमा संस्थानों और किसी भी अन्य हितधारकों के संघों, का प्रतिनिधित्व करने के लिए नामित कर सकेगी, जिनका प्रतिनिधित्व केन्द्र सरकार की राय में केन्द्रीय सलाहकार समिति में होना चाहिए।
- उपबंध (d) की उपधारा (2) में निर्दिष्ट श्रेणियों में से प्रत्येक से केंद्रीय सलाहकार समिति के सदस्य के रूप में नियुक्त किए जाने वाले व्यक्तियों की संख्या, कार्यालय की अवधि और उनके कार्यों के निर्वहन में सेवा की अन्य शर्तें व पालन की जाने वाली प्रक्रिया और उनमें से रिक्त पदों को भरने का तरीका वही होगा जैसा कि विहित किया जा सकेगा;
अन्य बातों के होते हुए, संनिर्माण श्रमिकों का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्यों की संख्या नियोक्ताओं का प्रतिनिधित्व करने के लिए मनोनीत सदस्यों की संख्या से कम नहीं होगी।
- एतद्द्वारा यह घोषित किया जाता है कि केंद्रीय सलाहकार समिति के सदस्य का पद, संसद के किसी भी सदन का सदस्य होने के लिए या चुने जाने के लिए पद धारक को अयोग्य घोषित नहीं करेगा।
टिप्पणी: केन्द्र सरकार को केन्द्रीय भवन एवं अन्य संनिर्माण श्रमिक सलाहकार समिति का गठन करने का अधिकार दिया गया है। समिति में एक अध्यक्ष, तीन संसद सदस्य, निरीक्षण महानिदेशक, नियोक्ताओं, भवन संनिर्माण कर्मकारों, वास्तुकार संगठनों, इंजीनियरों, दुर्घटना बीमा संस्थानों और किसी भी अन्य हितधारकों के संघों, का प्रतिनिधित्व करने के लिए सरकार द्वारा नामित तेरह से अनधिक परंतु न्यूनतम नौ व्यक्ति शामिल होते हैं।
(4) राज्य सलाहकार समिति -
- राज्य सरकार, इस अधिनियम के प्रशासन से उत्पन्न होने वाले इस तरह के मामलों पर या अन्य मामले जो उसे संदर्भित किए जा सकते हैं, पर राज्य सरकार को सलाह देने के लिए एक समिति का गठन करेगी जिसे राज्य भवन एवं संनिर्माण श्रमिक सलाहकार समिति; जिसे इसके पश्चात राज्य सलाहकार समिति कहा गया हैद्ध कहा जायेगा।
- राज्य सलाहकार समिति निम्नलिखित से मिलकर बनेगी -
- अध्यक्ष जो राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किया जायेगा;
- राज्य विधानमंडल के सदस्यों से निर्वाचित राज्य विधानसभा के दो सदस्य
- केंद्र सरकार द्वारा नामित एक सदस्य;
- मुख्य निरीक्षकः पदेन सदस्य;
- ऐसी संख्या में अन्य सदस्य जो ग्यारह से अनधिक परंतु सात से कम नहीं होगें, जैसा कि राज्य सरकार नियोजकों, भवन कर्मकारों, वास्तुविदों के संगठनों, इंजीनियरों और दुर्घटना बीमा संस्था या अन्य हितधारकों का प्रतिनिधित्व करने के लिए जिनका नाम निर्देशन राज्य सरकार करेगी या राज्य सरकार की राय में जिनका प्रतिनिधित्व राज्य सलाहकार समिति में होना चाहिए।
- उपबंध (d) की उपधारा (2) में निर्दिष्ट श्रेणियों में से प्रत्येक से केंद्रीय सलाहकार समिति के सदस्य के रूप में नियुक्त किए जाने वाले व्यक्तियों की संख्या, कार्यालय की अवधि और उनके कार्यों के निर्वहन में सेवा की अन्य शर्तें व पालन की जाने वाली प्रक्रिया और उनमें से रिक्त पदों को भरने का तरीका वही होगा जैसा कि विहित किया जा सकेगा|
अन्य बातों के होते हुए, संनिर्माण श्रमिकों का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्यों की संख्या नियोक्ताओं का प्रतिनिधित्व करने के लिए मनोनीत सदस्यों की संख्या से कम नहीं होगी।
टिप्पणी राज्य सरकार को राज्य भवन एवं अन्य संनिर्माण श्रमिक सलाहकार समिति का गठन करने का अधिकार दिया गया है। समिति में एक अध्यक्ष, दो विधानसभा सदस्य, केंद्र सरकार द्वारा नामित एक सदस्य, निरीक्षण महानिरीक्षक, नियोक्ताओं, भवन संनिर्माण कर्मकारों, वास्तुकार संगठनों, इंजीनियरों, दुर्घटना बीमा संस्थानों व किसी भी अन्य हितधारकों के संघों का प्रतिनिधित्व करने के लिए सरकार द्वारा नामित ग्यारह से अनधिक परंतु न्यूनतम सात व्यक्ति शामिल होते हैं।
(5) विशेषज्ञ समितियां -
- समुचित सरकार, इस अधिनियम के तहत नियम बनाने के लिए सरकार को सलाह देने हेतु भवन व अन्य संनिर्माण कार्य में विशेष रूप से योग्य व्यक्तियों को मिलाकर एक या एक से अधिक विशेषज्ञ समितियों का गठन कर सकती है।
- विशेषज्ञ समिति के सदस्यों को समिति की बैठकों में भाग लेने के लिए विहित फीस और भत्ते का भुगतान किया जाएगा;
- बशर्ते, ऐसे सदस्य को कोई शुल्क या भत्ता देय नहीं होगा जो सरकार का कोई अधिकारी है या तत्समय प्रवृत्त किसी कानून के तहत स्थापित कोई भी निगमित निकाय है।
प्रतिष्ठानों का पंजीकरण
(6) पंजीकरण अधिकारियों की नियुक्ति -
समुचित सरकार, सरकारी राजपत्र में अधिसूचित आदेश द्वारा -
- इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, सरकार, ऐसे व्यक्ति को राजपत्रित अधिकारी के रूप में पंजीकरण अधिकारी नियुक्ति करेगी जैसा वह उचित समझे; और
- उन सीमाओं को परिभाषित करेगी जिनके अंतर्गत पंजीयन अधिकारी इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करेगा।
(7) प्रतिष्ठानों का पंजीकरण -
- प्रत्येक नियोक्ता -
- एक प्रतिष्ठान के संबंध में जिस पर यह अधिनियम अपने प्रारंभ पर लागू होता है, ऐसे प्रारंभ से साठ दिनों की अवधि के भीतर पंजीकृत करायेगा और
- किसी भी ऐसे अन्य प्रतिष्ठान के संबंध में जिस पर यह अधिनियम ऐसे प्रारंभ के बाद प्रतिष्ठान पर लागू हो जाता है, ऐसे प्रतिष्ठान पर इस अधिनियम के लागू होने की तारीख से साठ दिनों की अवधि के भीतर, ऐसे प्रतिष्ठान के पंजीकरण के लिए पंजीकरण अधिकारी को आवेदन प्रस्तुत करेगा;
बशर्ते, पंजीकरण अधिकारी, उक्त अवधि की समाप्ति के बाद भी ऐसे आवेदनों पर विचार कर सकता है यदि उसे समाधान हो जाता है कि आवेदक को ऐसी अवधि के भीतर आवेदन करने से पर्याप्त कारणों से रोका गया था।
- उप-धारा (1) के तहत प्रत्येक आवेदन ऐसे रूप में होगा और उसमें ऐसे विवरण होने चाहिए तथा शुल्क शामिल होना चाहिए जैसा कि विहित किया जाएगा।
- उप-धारा (1), के तहत आवेदन प्राप्त होने के बाद, पंजीयन अधिकारी प्रतिष्ठान को पंजीकृत करेगा और स्थितियों के अधीन ऐसे समय व प्रारूप पर उसके नियोक्ता को पंजीकरण का प्रमाण पत्र जारी करेगा जैसा कि विहित किया जा सकेगा।
- जहां, इस धारा के तहत किसी प्रतिष्ठान के पंजीकरण के बाद, स्वामित्व या प्रबंधन या इस तरह की प्रतिष्ठान के संबंध में अन्य विहित ब्यौरे में कोई भी परिवर्तन होता है, वहां नियोक्ता द्वारा इस तरह के परिवर्तन का विवरण तीस दिनों के भीतर विहित प्रारूप पर पंजीकरण अधिकारी को सूचित करना होगा।
- टिप्पणी - एक प्रतिष्ठान का प्रत्येक नियोक्ता, जिस पर यह अधिनियम लागू होता है और जिस पर यह अधिनियम किसी भी समय लागू किया जा सकता है, उस तिथि से जिससे यह अधिनियम उस प्रतिष्ठान पर लागू हो जाता है, से अधिनियम के प्रारंभ होने के साठ दिनों की अवधि के भीतर, को एक विहित प्रारूप पर विहित शुल्क के साथ अपने प्रतिष्ठान के पंजीकरण के लिए आवेदन करना आवश्यक है।
(8) कुछ मामलों में पंजीकरण का रद्दीकरण -
यदि किसी पंजीकरण अधिकारी को या तो इस संबंध में उसे किए गए किसी संदर्भ से या अन्यथा समाधान हो जाता है कि, किसी भी प्रतिष्ठान का पंजीकरण मिथ्या निरूपण या किसी गलती को छुपाकर प्राप्त किया गया है या इस तरह के प्रतिष्ठान द्वारा किए गए किसी भी काम के संबंध में इस अधिनियम का पालन नहीं किया जा रहा है, या किसी भी अन्य कारण से जिससे पंजीकरण बेकार या अप्रभावी हो गया है और इसलिए उसे रद्द किया जाना आवश्यक है तो प्रतिष्ठान के नियोक्ता को सुने जाने का एक अवसर देने के बाद, पंजीकरण रद्द कर सकता है।
टिप्पणी - यदि किसी प्रतिष्ठान का पंजीकरण मिथ्या प्रस्तुति से या महत्वपूर्ण त्रुटि को छुपाकर छुपाकर कराया गया है और यदि अधिनियम के प्रावधानों का, ऐसे प्रतिष्ठान द्वारा किए गए किसी भी कार्य के संबंध में के साथ पालन नहीं किया जा रहा हैं तो पंजीकरण अधिकारी द्वारा प्रतिष्ठान के नियोक्ता को सुने जाने का एक अवसर देकर पंजीकरण रद्द किया जा सकता है।
(9) अपील -
- धारा 8 के अधीन किए गए आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति, उसके पास आदेश भेजे जाने की तारीख से तीस दिन के भीतर से इस संबंध में अपीलीय अधिकारी को अपील कर सकता है जो समुचित सरकार द्वारा नामित एक व्यक्ति होगा।
बशर्ते, अपीलीय अधिकारी तीस दिन की अवधि समाप्त होने के बाद भी अपील पर विचार कर सकता है यदि वह इस बात से संतुष्ट है, अपीलार्थी समय पर अपील करने से पर्याप्त कारणों से रोका गया था।
- उप-धारा (1) के तहत कोई अपील प्राप्त होने पर, अपीलीय अधिकारी, अपीलार्थी को सुनवाई का एक अवसर देने के बाद, यथासंभव शीघ्रता से निरस्तीकरण के आदेश की, पुष्टि, उसमें संशोधन या निरस्त करेगा।.
टिप्पणी - यदि किसी प्रतिष्ठान का नियोक्ता पंजीकरण के अधिकारी के आदेश से व्यथित है तो वह आदेश भेजे जाने की तारीख से तीस दिन के भीतर अपीलीय अधिकारी के समक्ष सभी अपील कर सकता है। अपीलार्थी, तीस दिन की समाप्ति के बाद भी अपील दायर कर सकता है यदि अपीलार्थी अपीलीय अधिकारी को इस बात से संतुष्ट कर पाता है कि उसे समय में अपील दायर करने से पर्याप्त कारणों से रोका गया था।
(10) गैर पंजीकरण का प्रभाव -
किसी प्रतिष्ठान का नियोक्ता जिस पर यह अधिनियम लागू होता है, ऐसा नहीं करेगा -
- यदि प्रतिष्ठान के लिए धारा 7 के तहत पंजीकृत होना आवश्यक है, लेकिन उस इस धारा के तहत पंजीकृत नहीं किया गया है;
- एक प्रतिष्ठान के संबंध में जिसका पंजीकरण धारा 8 के तहत रद्द कर दिया गया है और धारा 9 के तहत निरस्तीकरण आदेश के विरूद्ध, अपील दायर करने की समय सीमा के भीतर कोई अपील नहीं की गई है या यदि जहां ऐसी अपील की गई है उस अपील को रद्द कर दिया गया है, प्रतिष्ठान धारा (7) की उपधारा () के खंड (a) या खंड (b) में निर्दिष्ट अवधि की समाप्ति के बाद या धारा 8 के तहत पंजीकरण निरस्त होने या धारा 9 के तहत अपील दायर करने की अवधि समाप्त होने या की अपील बर्खास्त किए जाने के बाद जैसी भी स्थिति हो संनिर्माण श्रमिकों को नियोजित करता है।
टिप्पणी - किसी प्रतिष्ठान, जिसका पंजीकरण कराना आवश्यक है लेकिन उसका पंजीकरण नहीं किया गया है या ऐसे प्रतिष्ठान का पंजीकरण रद्द कर दिया गया है और कोई अपील नहीं की गई है या जहां अपील की गई है, परंतु उसे खारिज कर दिया गया है, का नियोक्ता संनिर्माण श्रमिकों को नियोजित नहीं कर सकता है।
भवन संनिर्माण कर्मकारों का लाभार्थियों के रूप में पंजीकरण
(11) कोष के लाभार्थी -
इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, इस अधिनियम के तहत लाभार्थी के रूप में पंजीकृत प्रत्येक भवन संनिर्माण श्रमिक इस अधिनियम के तहत अपने कोष से बोर्ड द्वारा उपलब्ध कराए गए लाभों का हकदार होगा।
(12) लाभार्थियों के रूप में भवन संनिर्माण श्रमिकों का पंजीकरण -
- प्रत्येक भवन श्रमिक जिसने अठारह वर्ष की आयु पूर्ण कर ली है, परंतु साठ वर्ष की आयु पूर्ण नहीं की है, और पिछले बारह महीनों के दौरान नब्बे दिन से अनधिक दिनों के लिए किसी भी भवन या अन्य संनिर्माण कार्य में संलग्न है, इस अधिनियम के तहत लाभार्थी के रूप में पंजीकृत होने के लिए पात्र होगा।
- पंजीकरण के लिए आवेदन का प्रारूप वही होगा जो इस संबंध में बोर्ड द्वारा अधिकृत अधिकारी द्वारा विहित किया जा सकता है।
- उप-धारा 2 के तहत प्रत्येक आवेदन निर्दिष्ट दस्तावेज व शुल्क जो पचास रुपए से अधिक नहीं होगा के साथ प्रस्तुत किए जाएगें।
- यदि उप-धारा 2 के तहत बोर्ड द्वारा प्राधिकृत अधिकारी इस बात से संतुष्ट हो जाता है कि आवेदक इस अधिनियम के उपबंधों और उसके अधीन बनाए गए नियमों अनुसार है, तो वह इस अधिनियम के तहत एक लाभार्थी के रूप में भवन संनिर्माण कर्मकार का नाम पंजीकृत करेगा;
बशर्ते, पंजीकरण आवेदन को आवेदक को सुनवाई का एक मौका दिए बिना अस्वीकार नहीं किया जा सकेगा।
- उप-धारा 4 के तहत निर्णय से व्यथित कोई व्यक्ति, इस तरह के निर्णय की तिथि से तीस दिनों के भीतर बोर्ड के सचिव को या इस संबंध में बोर्ड द्वारा निर्दिष्ट किसी अन्य अधिकारी के समक्ष एक अपील करेगा और ऐसी अपील पर सचिव या ऐसे अन्य अधिकारी का निर्णय अंतिम होगा; बशर्ते, सचिव या इस संबंध में बोर्ड द्वारा निर्दिष्ट कोई अन्य अधिकारी तीस दिन की अवधि समाप्त होने के बाद भी अपील पर विचार कर सकता है यदि वह इस बात से संतुष्ट है कि भवन संनिर्माण श्रमिक को समय के भीतर अपील दायर करने से पर्याप्त कारण से रोका गया था।
- बोर्ड का सचिव ऐसे रजिस्टरों को बनाए रखना तय करेगा जैसा कि निर्दिष्ट किया जायेगा।
टिप्पणी - प्रत्येक भवन श्रमिक जिसकी आयु अठारह और साठ वर्ष के बीच में है और जो पिछले 12 महीनों के दौरान नब्बे से अनधिक दिनों के लिए किसी भी भवन या अन्य संनिर्माण कार्य में संलग्न है, भवन और अन्य संनिर्माण श्रमिक कल्याण कोष के एक लाभार्थी के रूप में पंजीकरण के लिए पात्र है। पंजीकरण के लिए आवेदन विहित प्रपत्र में और विहित दस्तावेज के साथ किया जा सकता है जिसके लिए शुल्क पचास रूपये से अधिक नहीं होगा।
(13) पहचान पत्र -
- बोर्ड, प्रत्येक लाभार्थी को उसकी तस्वीर विधिवत चिपका कर उसके साथ इमारत या उसके द्वारा किए गए अन्य संनिर्माण कार्य का विवरण दर्ज करने के लिए पर्याप्त स्थान के साथ पहचान पत्र प्रदान करेगा।
- प्रत्येक नियोक्ता पहचान कार्ड में लाभार्थी द्वारा किये गये भवन संनिर्माण या अन्य संनिर्माण कार्य का विवरण दर्ज करेगा और उसको प्रमाणित कर लाभार्थी को वापस करेगा।
- इस अधिनियम के तहत लाभार्थी को जारी पहचान कार्ड सरकार या बोर्ड के किसी भी अधिकारी, किसी भी निरीक्षक या निरीक्षण के लिए किसी अन्य प्राधिकारी द्वारा की मांगे जाने पर प्रस्तुत करना होगा।
(14) एक लाभार्थी के रूप में समापन -
- इस अधिनियम के तहत एक लाभार्थी के रूप में पंजीकृत कोई भी भवन संनिर्माण श्रमिक साठ वर्ष की आयु पूरी कर लेने पर या वह एक वर्ष में नब्बे से अनधिक दिनों के लिए भवन संनिर्माण या अन्य संनिर्माण कार्य में संलग्न न रहने पर इस रूप में नहीं रह जाएगा;
बशर्ते, इस उपधारा के तहत नब्बे दिन की अवधि की संगणना में श्रमिक के नियोजन के दौरान दुर्घटना की वजह से श्रमिक की किसी भी व्यक्तिगत चोट के कारण भवन संनिर्माण या अन्य संनिर्माण कार्य से अनुपस्थिति को अनुपस्थिति की किसी भी अवधि से बाहर रखा जाएगा।
- उप-धारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, यदि कोई व्यक्ति साठ वर्ष की आयु प्राप्त करने से ठीक पहले कम से कम तीन वर्षों तक लगातार लाभार्थी रहा है तो, वह इस तरह के लाभ प्राप्त करने का पात्र होगा जैसा कि विहित किया जा सकेगा।
स्पष्टीकरण - इस उपधारा के तहत किसी बोर्ड के साथ एक लाभार्थी के रूप में तीन वर्ष की अवधि की संगणना में, पंजीकरण से पहले किसी व्यक्ति के अन्य बोर्ड के लाभार्थी, होने की अवधि को शामिल किया जायेगा।
(15) लाभार्थियों का पंजीकरण -
प्रत्येक नियोक्ता उसके द्वारा कराए जा रहे भवन या अन्य संनिर्माण कार्य में नियोजित लाभार्थियों के रोजगार का विवरण दर्शाते हुए ऐसे प्रारूप में एक रजिस्टर रखेगा जैसा कि विहित किया जा सकेगा और बोर्ड के सचिव द्वारा या इस संबंध में बोर्ड द्वारा विधिवत अधिकृत किसी अन्य अधिकारी द्वारा किसी पूर्व सूचना के बिना उसका निरीक्षण किया जा सकेगा।
(16) संनिर्माण श्रमिकों का योगदान -
- इस अधिनियम के तहत एक लाभार्थी के रूप में पंजीकृत किसी भवन संनिर्माण श्रमिक, जब तक कि वह साठ वर्ष की आयु प्राप्त नहीं कर लेता है, कोष में प्रति माह ऐसी दर से योगदान करेगा जैसा कि राज्य सरकार द्वारा सरकारी राजपत्र में अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट किया जा सकेगा, और संनिर्माण श्रमिकों के विभिन्न वर्गों के लिए योगदान की विभिन्न दरें निर्दिष्ट की जा सकेगीं।
बशर्ते, बोर्ड, यदि उसे यह समाधान हो जाता है कि एक लाभार्थी किसी वित्तीय परेशानी के कारण अपने योगदान का भुगतान करने में असमर्थ है, योगदान का भुगतान माफ कर सकता है जो एक बार में तीन माह से अधिक की अवधि के लिए नहीं होगा।
- लाभार्थी अपने मासिक वेतन से अपना योगदान काटने के लिए अपने नियोक्ता को प्राधिकृत कर सकेगा और ऐसी कटौती के पंद्रह दिनों के भीतर, बोर्ड को प्रषित करेगा।
टिप्पणी - एक पंजीकृत लाभार्थी, जब तक कि वह साठ वर्ष की आयु पूरी नहीं कर लेता है, कोष में, राज्य सरकार द्वारा निर्दिष्ट दरों पर योगदान करेगा। यदि कोई भी लाभार्थी किसी भी वित्तीय परेशानी के कारण अपने योगदान का भुगतान करने में असमर्थ है, तो भवन एवं अन्य संनिर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड योगदान का भुगतान माफ कर सकता है जो एक बार में तीन माह से अधिक की अवधि के लिए नहीं होगा।
(17) योगदान का भुगतान न करने का प्रभाव -
यदि कोई लाभार्थी धारा 16 की उप-धारा (1) के तहत कम से कम एक वर्ष की एक निरंतर अवधि के लिए अपने योगदान का भुगतान नहीं करेगा तो वह लाभार्थी नहीं रह जाएगा;
बशर्ते, बोर्ड के सचिव को यह समाधान हो जाता है कि योगदान का भुगतान न करने का कारण युक्तियुक्त है और भवन संनिर्माण श्रमिक बकाया जमा करने के लिए तैयार है, तो वह भवन संनिर्माण श्रमिक को बकाया राशि जमा करने की अनुमति दे सकता है और इस प्रकार योगदान के जमा किए जाने पर भवन संनिर्माण श्रमिक का पंजीकरण बहाल हो जाएगा।
टिप्पणी - यदि कोई भी लाभार्थी कम से कम एक वर्ष की निरंतर अवधि के लिए अपने योगदान का भुगतान करने में विफल रहता है, तो वह कोष का एक लाभार्थी नहीं रहेगा। परंतु यदि योगदान भुगतान करने में विफलता युक्तियुक्त कारण से थी और भवन संनिर्माण श्रमिक बकाया जमा करने के लिए तैयार है तो उसका पंजीकरण बहाल किया जा सकेगा।
भवन एवं अन्य संनिर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड
(18) राज्य के कल्याण बोर्डों का गठन -
- प्रत्येक राज्य सरकार, ऐसी तिथि के प्रभाव से जैसा वह, अधिसूचना द्वारा, नियुक्त करे, इस अधिनियम के अधीन प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करने या उसे सौंपे के गये कार्यों को निष्पादित करने के लिए एक बोर्ड का गठन करेगी जिसे; राज्य का नामद्ध भवन एवं अन्य संनिर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड के नाम से जाना जायेगा।
- बोर्ड, पूर्वोक्त नाम का एक निगमित निकाय होगा, जिसका चिरकालीन उत्तराधिकार होगा और एक मुहर होगी और उक्त नाम से वाद दायर कर सकेगा और उस वाद दायर किया जा सकेगा।
- बोर्ड का अध्यक्ष केन्द्र सरकार द्वारा नामित एक व्यक्ति होगा, और उसमें अन्य सदस्य राज्य सरकार द्वारा इतनी संख्या से नामांकित किए जायेगें, जो पंद्रह से अनधिक होगें;
बशर्ते बोर्ड में राज्य सरकार, नियोक्ताओं और संनिर्माण श्रमिकों प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्य समान संख्या में शामिल होगें और बोर्ड की कम से कम एक सदस्य महिला होगी;
- अध्यक्ष तथा बोर्ड के अन्य सदस्यों की नियुक्ति की शर्तें और देय वेतन व अन्य भत्ते और बोर्ड के सदस्यों की आकस्मिक रिक्तियों को भरने का तरीका वही होगा जैसा कि विहित किया जा सकेगा।
(19) सचिव व बोर्ड के अन्य अधिकारी -
- बोर्ड एक सचिव तथा इस तरह के अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति करेगा जैसा वह इस अधिनियम के तहत अपने कार्यों के कुशल निर्वहन के लिए आवश्यक समझे।
- बोर्ड का सचिव उसका मुख्य कार्यकारी अधिकारी होगा।
- सचिव व बोर्ड के अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों की नियुक्ति के नियम व शर्तें तथा देय वेतन व भत्ते वही होगें जैसा कि विहित किया जा सकेगा।
(20) बोर्ड की बैठक -
- बोर्ड ऐसे समय व स्थान पर बैठक करेगा और अपनी बैठकों में ऐसे प्रक्रियागत नियमों का पालन करेगा ;इस तरह की बैठकों में गणपूर्ति सहितद्ध जैसा कि विहित किया जा सकेगा।
- अध्यक्ष या, यदि किसी भी कारण से वह बोर्ड की बैठक में भाग लेने में असमर्थ है, तो इस संबंध में अध्यक्ष द्वारा नामित कोई सदस्य और इस तरह के नामांकन की अनुपस्थिति में, बैठक में उपस्थित सदस्यों द्वारा आपस में से चुना गया कोई अन्य सदस्य बैठक की अध्यक्षता करेगा।
- बोर्ड की किसी भी बैठक के समक्ष आने वाले सभी प्रश्न उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के मतों के बहुमत से तय किये जाएगें, और मतों के समान होने की स्थिति में, अध्यक्ष, या उसकी अनुपस्थिति में, पीठासीन व्यक्ति, दूसरा या निर्णायक मत दे सकेगा।
(21) रिक्तियां आदि, बोर्ड की कार्यवाही रद्द नहीं कर सकेगीं -
बोर्ड का कोई भी कार्य या कार्यवाही निम्नलिखित के होने के कारण मात्र से अमान्य नहीं होगी -
- बोर्ड में, कोई भी रिक्ति, या गठन में किसी भी दोष; या
- बोर्ड के सदस्य के रूप में कार्यरत किसी व्यक्ति की नियुक्ति में किसी दोष; या
- बोर्ड की प्रक्रिया में कोई अनियमितता जो मामले की श्रेष्ठता को प्रभावित नहीं।
(22) बोर्ड की कार्य -
- बोर्ड निम्नलिखित कार्य कर सकेगा -
- दुर्घटना की स्थिति में किसी लाभार्थी को तत्काल सहायता प्रदान करना;
- साठ साल की आयु पूरी कर चुके लाभार्थियों को पेंशन का भुगतान करना;
- किसी लाभार्थी को घर के संनिर्माण के लिए ऋण व अग्रिम की स्वीकृति जो ऐसी राशि से अधिक नहीं होगी और ऐसे नियम और शर्तों पर होगा जैसा कि विहित किया जा सकेगा;
- लाभार्थियों के सामूहिक बीमा योजना के लिए प्रीमियम के संबंध में ऐसी राशि का भुगतान कर सकेगा जैसा वह उचित समझे;
- लाभार्थियों के बच्चों की शिक्षा के लिए ऐसी वित्तीय सहायता दे सकेगा जैसा कि विहित किया जा सकेगा;
- लाभार्थी की प्रमुख बीमारियों या, इस तरह के आश्रित, जैसा कि विहित किया जा सकेगा, के उपचार के लिए ऐसी चिकित्सा खर्च का भुगतान;
- महिला लाभार्थियों को मातृत्व लाभ का भुगतानय और
- ऐसे अन्य कल्याणकारी उपाय और सुविधाओं का प्रावधान और उनमें सुधार करना जैसा कि विहित किया जा सकेगा।
- बोर्ड किसी भी प्रतिष्ठान में संनिर्माण श्रमिकों के कल्याण से जुड़े उद्देश्य के लिए राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित किसी भी योजना के सहायतार्थ किसी स्थानीय प्राधिकारी या नियोक्ता को ऋण या सब्सिडी प्रदान कर सकेगा।
- यदि संनिर्माण श्रमिकों और उनके परिवार के सदस्यों के हित के लिए बोर्ड द्वारा निर्दिष्ट मानक के अनुसार कल्याणकारी उपायों और सुविधाओं के प्रति बोर्ड के सदस्यों को समाधान हो जाता है तो बोर्ड स्थानीय प्राधिकारी या नियोक्ता को वार्षिक अनुदान सहायता भुगतान कर सकेगा, परंतु, किसी भी स्थानीय प्राधिकारी या नियोक्ता को देय यह अनुदान सहायता निम्न से अधिक नहीं हो सकेगी -
- राज्य सरकार या इस संबंध में उसके द्वारा निर्दिष्ट किसी भी व्यक्ति द्वारा जैसा भी विहित किया जाए, कल्याणकारी उपाय और सुविधाएं प्रदान करने में खर्च की गई राशि है, या
- ऐसी राशि जो विहित की जा सकेगी, जो भी कम हो;
- बशर्ते कि, जहां किसी भी तरह के कल्याण उपायों और सुविधाओं के संबंध में पूर्वोक्त रूप में विहित उस पर खर्च की गई राशि इस संबंध में विहित राशि से कम है, कोई अनुदान सहायता देय नहीं होगी।
(23) केन्द्र सरकार द्वारा अनुदान और ऋण -
केन्द्र सरकार, इस संबंध में कानून द्वारा संसद द्वारा समुचित विनियोजन के बाद, एक बोर्ड को ऐसी धनराशि का अनुदान व ऋण प्रदान कर सकेगी, जैसा सरकार आवश्यक समझे।
(24) भवन एवं अन्य संनिर्माण श्रमिक कल्याण कोष और उसका लागू होना -
- बोर्ड द्वारा एक कोष का गठन किया जाएगा जिसे भवन एवं अन्य संनिर्माण श्रमिक कल्याण कोष कहा जायेगा और उसमें निम्न राशियां जमा की जायेगीं -
- धारा 23 के तहत केन्द्र सरकार द्वारा बोर्ड को दिया गया कोई भी ऋण या अनुदान, और
- लाभार्थियों द्वारा किए गए सभी योगदान;
- बोर्ड द्वारा इस तरह के अन्य स्रोतों से प्राप्त सभी राशियां जैसा कि केन्द्र सरकार विहित करेगी,
- यह कोष निम्न की पूर्ति के लिए लगाया जा सकेगा -
- धारा 22 के तहत अपने कार्यों के निर्वहन में बोर्ड का व्यय; और
- बोर्ड के सदस्यों, अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के वेतन, भत्ते व अन्य पारिश्रमिक;
- इस अधिनियम के द्वारा अधिकृत उद्देश्यों और प्रयोजनों पर खर्च।
- कोई भी बोर्ड, किसी भी वित्तीय वर्ष में, अपने सदस्यों, अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों को वेतन, भत्ते और अन्य पारिश्रमिक तथा अन्य प्रशासनिक खर्चों को पूरा करने के लिए उस वित्त वर्ष के दौरान अपने कुल खर्च के पांच प्रतिशत से अधिक खर्च नहीं कर सकेगा।
(25) बजट -
बोर्ड, प्रत्येक वित्तीय वर्ष में ऐसे प्रारूप व समय पर जैसा कि विहित किया जा सकेगा, अनुमानित प्राप्तियों और बोर्ड का व्यय दिखाते हुए, अगले वित्त वर्ष के लिए अपना बजट तैयार करेगा, और राज्य सरकार एवं केन्द्र सरकार को अग्रेषित करेगा।
(26) वार्षिक रिपोर्ट -
बोर्ड, प्रत्येक वित्तीय वर्ष में ऐसे प्रारूप व समय पर जैसा कि विहित किया जा सकेगा, पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान अपनी गतिविधियों का पूरा लेखा जोखा देते हुए, अपनी वार्षिक रिपोर्ट तैयार करेगा, और राज्य सरकार एवं केन्द्र सरकार को अग्रेषित करेगा।
(27) लेखा और लेखा परीक्षा -
- बोर्ड समुचित लेखे और अन्य प्रासंगिक रिकॉर्ड बनाए रखेगा और ऐसे प्रारूप में लेखों का एक वार्षिक विवरण तैयार करेगा जैसा कि भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के परामर्श से विहित किया जा सकेगा।
- भारत का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक या इस अधिनियम के तहत बोर्ड के लेखों की लेखापरीक्षा के संबंध मंे उसके द्वारा नियुक्त कोई अन्य व्यक्ति को इस तरह की लेखापरीक्षा के संबंध में वही अधिकार व विशेषाधिकार तथा प्राधिकार प्राप्त होगें जो कि भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक को सरकार लेखों के लेखापरीक्षण के संबंध में होते हैं और विशेष रूप से बही, लेखों, संबंधित वाउचरों और अन्य दस्तावेजों व अभिलेखों को मांगे जाने के लिए और इस अधिनियम के तहत बोर्ड के किसी भी अधिकारी का निरीक्षण करने का अधिकार होगा।
- बोर्ड के लेखों की लेखापरीक्षा भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक द्वारा सालाना आधार पर की जाएगी और इस तरह की लेखापरीक्षा के संबंध में किया गया व्यय बोर्ड द्वारा भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक को देय होगा।
- बोर्ड लेखा परीक्षक की रिपोर्ट के साथ अपने लेखों की लेखापरीक्षित प्रतिलिपि राज्य सरकार के समक्ष ऐसी तिथि से पूर्व प्रस्तुत करेगा जैसा कि विहित किया जा सकेगा।
- राज्य सरकार वार्षिक रिपोर्ट और लेखा परीक्षक की रिपोर्ट जैसे ही वे प्राप्त हों, राज्य विधानमंडल के समक्ष, प्रस्तुत करना तय करेगी।
कार्य समय, कल्याणकारी उपाय एवं संनिर्माण श्रमिकों की सेवा की अन्य शर्तें
(28) सामान्य कार्य दिवस, के लिए समय नियत करना आदि -
- समुचित सरकार, नियम द्वारा -
- किसी भवन संनिर्माण श्रमिक के लिए एक या अधिक निर्दिष्ट अंतराल का समावेश करते हुए सामान्य कार्य दिवस में काम के घंटों को नियत करेगी;
- प्रत्येक सात दिनों की अवधि में आराम के लिए एक दिन प्रदान करेगी जो सभी संनिर्माण श्रमिकों के लिए अनुमन्य होगा और आराम के ऐसे दिनों के संबंध में पारिश्रमिक का भुगतान अनुमन्य होगा;
- आराम के दिन के काम के भुगतान के लिए प्रावधान करेगी जो धारा 29 में निर्दिष्ट ओवरटाइम दर से कम नहीं होगा।
- उप-धारा (1) के प्रावधान, संनिर्माण श्रमिकों के निम्न वर्गों के संबंध में, केवल उसी सीमा तक लागू होगें, और ऐसी परिस्थितियों के अधीन होगें, जैसा कि विहित किया जा सकेगा, अर्थात् -
- तात्कालिक कार्य में संलग्न व्यक्ति, या किसी आपात स्थिति में जिसका अनुमानित या रोका नहीं जा सकता था;
- प्रारंभिक या पूरक काम की प्रकृति में एक काम में लगे व्यक्ति जो आवश्यक रूप से नियम में विहित कार्य के सामान्य घंटों के बाद ही किया जा सकता है;
- किसी भी ऐसे काम में संलग्न व्यक्ति जिसे तकनीकी कारणों से दिन की समाप्ति से पहले पूरा किया जाना है
- किसी भी ऐसे काम में संलग्न व्यक्ति जिसे प्राकृतिक बलों की अनियमित कार्रवाई पर निर्भर समय के अतिरिक्त नहीं किया जा सकता है।
टिप्पणी सरकार को, भवन श्रमिकों के लिए काम के घंटों की संख्या तय करने और प्रत्येक 7 दिनों की अवधि में आराम के लिए एक दिन प्रदान करने और ऐसे आराम के दिन पर कार्य के संबंध में पारिश्रमिक का भुगतान करने, आराम के दिन काम के लिए ओवरटाइम दर से अन्यून दर से भुगतान दिलाने का प्रावधान करने का अधिकार है।
(29) ओवरटाइम कार्य के लिए वेतन -
- जहां कहीं भी किसी भी भवन संनिर्माण श्रमिक को किसी भी दिन एक सामान्य कार्य दिवस के घंटों की संख्या से अधिक समय तक कार्य करने की आवश्यकता होती है, तो वह मजदूरी साधारण दर के दुगुने दर से मजदूरी पाने का हकदार होगा।
- इस धारा के प्रयोजन के लिए, ‘मजदूरी की सामान्य दर’ से आशय, मूल वेतन के साथ ऐसे भत्तों से है श्रमिक उस समय जिनका हकदार है, लेकिन इसमें कोई भी बोनस शामिल नहीं है।
टिप्पणी यदि जहां कहीं भी किसी भी भवन संनिर्माण श्रमिक को किसी भी दिन एक सामान्य कार्य दिवस के घंटों की संख्या से अधिक समय तक कार्य करने की आवश्यकता होती है, तो वह मजदूरी साधारण दर के दुगुने दर से मजदूरी पाने का हकदार होगा।
(30) रजिस्टर और अभिलेखों का रखरखाव -
- प्रत्येक नियोक्ता उसके द्वारा नियोजित संनिर्माण श्रमिकों के ऐसे विवरण देते हुए ऐसे रजिस्टर व रिकॉर्ड रखेगा जिसमें, उनके द्वारा निष्पादित कार्य, काम के घंटों की संख्या जो उनके लिए एक सामान्य कार्य दिवस होगा, प्रत्येक सात दिनों की अवधि में आराम के दिन जिनकी उन्हें अनुमति है, उन्हें भुगतान की गई मजदूरी, उनके द्वारा प्रदत्त रसीदें और इस तरह के अन्य ब्यौरे जैसा कि विहित किया जा सकेगा।
- प्रत्येक नियोक्ता उस स्थान पर जहां ऐसे श्रमिकों को नियोजित किया जायेगा, विहित विवरण के साथ विहित प्रारूप में इस प्रकार सूचनाएं, प्रदर्शित करेगा जैसा कि विहित किया जा सकेगा।
- समुचित सरकार, नियम द्वारा, किसी प्रतिष्ठान में कार्यरत संनिर्माण श्रमिकों के लिए मजदूरी बही या मजदूरी पर्ची जारी करने का उपबंध कर सकेगी और नियोक्ता या उसके एजेंट द्वारा ऐसी मजदूरी बही या मजदूरी स्लिप में प्रविष्टि करने और प्रमाणीकृत करने का तरीका विहित कर सकेगी।
(31) कुछ भवन संनिर्माण या अन्य संनिर्माण कार्य में कुछ लोगों के नियोजन पर प्रतिषेध - ऐसे किसी भी के संबंध में जिसके बारे नियोक्ता जानता है या उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि वह बहरा है या वह उसकी दृष्टि दोषपूर्ण है या उसमें चक्कर आने की प्रवृत्ति है को किसी ऐसे भवन या अन्य संनिर्माण कार्य में नियोजित नहीं किया जा सकेगा जिसमें या तो स्वयं श्रमिक को या किसी अन्य व्यक्ति को किसी दुर्घटना का जोखिम होने की संभावना हो।
टिप्पणी कोई भी व्यक्ति जो बहरा है या उसकी दृष्टि दोषपूर्ण है या जिसमें चक्कर आने की प्रवृत्ति है को किसी ऐसे भवन या अन्य संनिर्माण कार्य में नियोजित नहीं किया जा सकेगा जिसमें या तो स्वयं श्रमिक को या किसी अन्य व्यक्ति को किसी दुर्घटना का जोखिम होने की संभावना हो।
(32) पेय जल -
- नियोक्ता प्रत्येक स्थान पर जहां भवन या अन्य संनिर्माण कार्य प्रगति पर है वहां कार्यरत सभी व्यक्तियों के लिए उपयुक्त स्थान पर, पौष्टिक पीने के पानी की पर्याप्त आपूर्ति उपलब्ध कराने और अनुरक्षित करने की प्रभावी व्यवस्था में करेगा।
- ऐसे प्रत्येक स्थान पर वहां पर कार्यरत अधिकतर व्यक्तियों द्वारा समझी जाने वाली पठनीय भाषा में पेयजल चिह्नित करेगा और ऐसा स्थान किसी भी धोने की जगह, मूत्रालय या शौचालय के छह मीटर की दूरी के भीतर स्थित नहीं होगा।
(33) शौचालयों व मूत्रालय -
प्रत्येक स्थान पर जहां भवन या अन्य संनिर्माण कार्य किया जाता है, नियोक्ता इस प्रकार शौचालय व मूत्रालय की पर्याप्त व्यवस्था करेगा जैसा कि विहित किया जा सकेगा और वे ऐसे सुविधाजनक स्थान पर होने चाहिए जैसा कि संनिर्माण श्रमिकों के लिए ऐसे स्थान पर कार्य करते समय सुलभ हो सकेगा।
बशर्ते, ऐसे किसी स्थान पर अलग मूत्रालय प्रदान करना आवश्यक नहीं होगा जहां पचास से कम व्यक्ति कार्यरत हैं या जहां शौचालय एक जल जनित सीवेज प्रणाली से जुड़े हैं।
(34) आवास -
- नियोक्ता, बिना किसी प्रभार के तथा कार्य स्थल पर या जितना संभव हो सके उसके निकट सभी भवन श्रमिकों को रहने के लिए ऐसी अवधि के लिए अस्थायी आवास प्रदान करेगा जिस अवधि तक भवन संनिर्माण या अन्य संनिर्माण कार्य प्रगति पर रहेगा।
- उप-धारा (1) के तहत प्रदत्त अस्थायी आवास में खाना पकाने, नहाने, कपड़े धोने और शौचालय की सुविधा के लिए अलग से स्थान होगा।
- भवन संनिर्माण या अन्य संनिर्माण कार्य समाप्त होने के बाद, जितनी जल्दी संभव सकेगा, नियोक्ता, अपने खर्च पर, उप-धारा (1) के तहत आवश्यक रहने के आवास खाना पकाने के स्थान या संनिर्माण श्रमिकों को प्रदान की जाने वाली अन्य सुविधाओं के उद्देश्य से उसके द्वारा बनवाये गये अस्थायी ढांचे को हटायेगा या उसका विध्वंस करेगा, और जमीन को अच्छे स्तर व स्वच्छ हालत में बहाल करेगा।
- यदि किसी नियोक्ता को नगर निगम के बोर्ड या, अन्य स्थानीय प्राधिकारी द्वारा इस धारा के तहत संनिर्माण श्रमिकों के लिए अस्थायी, आवास उपलब्ध कराने के प्रयोजन के लिए कोई जमीन देता है, तो वह संनिर्माण कार्य की समाप्ति के बाद जितनी जल्दी संभव हो सकेगा, ऐसी जमीन का स्वामित्व उसी स्थित में लौटायेगा जैसा कि प्राप्त करते समय, उसकी थी।
(35) शिशु गृह -
- उस प्रत्येक स्थान पर जहां आमतौर पर पचास से अधिक महिला भवन श्रमिक कार्यरत हैं, वहां पर ऐसी महिला श्रमिकों के छह वर्ष से कम आयु के बच्चों के इस्तेमाल के लिए उपयुक्त कमरे या कमरों की व्यवस्था व अनुरक्षण किया जायेगा।
- इस तरह के कमरे निम्न शर्तें पूरी करेगें -
- पर्याप्त आवास उपलब्ध कराना;
- पर्याप्त रूप से रोशनी युक्त और हवादार होना;
- साफ व अरोग्य की स्थिति में अनुरक्षित होना;
- बच्चों और शिशुओं की देखभाल में प्रशिक्षित महिलाओं के देखरेख के तहत होना
(36) प्राथमिक चिकित्सा -
प्रत्येक नियोक्ता, सभी स्थानों पर जहां भवन या अन्य संनिर्माण कार्य किया जा रहा है, ऐसी प्राथमिक चिकित्सा सुविधायें उपलब्ध करायेंगा जैसा कि विहित किया जा सकेगा।
(37) कैंटीन, आदि -
समुचित सरकार, नियम द्वारा नियोक्ता के लिए निम्नलिखित को आवश्यक बना सकती है -
- प्रत्येक स्थान पर जहां दो सौ और पचास से अन्यून श्रमिक आमतौर पर नियोजित हैं, श्रमिकों के इस्तेमाल के लिए एक कैंटीन का प्रावधान व अनुरक्षणय
- भवन संनिर्माण श्रमिकों के हित में इस तरह के अन्य कल्याणकारी उपाय का उपबंध जैसा कि विहित किया जा सकेगा।
सुरक्षा एवं स्वास्थ्य उपाय
38.सुरक्षा समिति और सुरक्षा अधिकारी - (1) प्रत्येक प्रतिष्ठान में जहां पांच सौ या इससे अधिक श्रमिक आमतौर पर कार्यरत हैं, नियोक्ता, नियोक्ता व संनिर्माण श्रमिकों के प्रतिनिधियों की ऐसी संख्या को शामिल करते हुए सुरक्षा समिति का गठन करेगा जैसा कि राज्य सरकार द्वारा विहित किया जा सकेगा; बशर्ते, कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले व्यक्तियों की संख्या, किसी भी स्थिति में, नियोक्ता का प्रतिनिधित्व करने वाले व्यक्तियों की तुलना में कम नहीं होगी।
उपधारा 1 में निर्दिष्ट प्रत्येक प्रतिष्ठान में, नियोक्ता, एक सुरक्षा अधिकारी की नियुक्ति करेगा जो ऐसी योग्यता धारित करेगा और ऐसे कर्तव्यों का पालन करेगा जैसा कि विहित किया जा सकेगा।
39. कुछ दुर्घटनाओं की सूचना -
- जहां भी किसी प्रतिष्ठान में कोई दुर्घटना होती है जिसके कारण मृत्यु या जो या कोई ऐसी शारीरिक चोट आती है जिसके कारण, व्यक्ति को दुर्घटना के तुरंत बाद अड़तालीस घंटे या अधिक अवधि के लिए काम करने से रोका जाता है, या वह ऐसी प्रकृति की है जैसा कि विहित किया जा सकेगा, तो नियोक्ता ऐसे प्राधिकारी ऐसे प्रारूप व समय के भीतर सूचित करेगा जैसा कि विहित किया जा सकेगा।
- उप-धारा (1) के तहत कोई सूचना प्राप्त होने पर उस उपधारा में निर्दिष्ट प्राधिकारी ऐसी जांच या पूछताछ कर सकता है जैसा वह आवश्यक समझे।
- जहां उप-धारा (1) के तहत दी गई सूचना, ऐसी दुर्घटना से संबंधित है जिसमें पांच या उससे अधिक व्यक्तियों की मृत्यु हो गई है, ऐसी स्थिति में प्राधिकारी सूचना प्राप्त होने के एक माह के भीतर ऐसी दुर्घटना की जांच करेगा।
40. संनिर्माण श्रमिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए नियम बनाने की समुचित सरकार की शक्तियां -
- समुचित सरकार, अधिसूचना द्वारा, उनके नियोजन के दौरान संनिर्माण श्रमिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य से संबंधित किए जाने वाले उपायों के बारे में और इस तरह के नियोजन के दौरान उनकी सुरक्षा, स्वास्थ्य व संरक्षण को सुनिश्चित करने के लिए उन्हें आवश्यक उपकरण और औजार प्रदान किये जाने के लिए नियम बना सकेगी।
- विशेष रूप से, और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किसी भी मामले में, निम्नलिखित का उपबंध कर सकेगीः -
- जब जमीन से या इमारत के किसी भी भाग से या सीढ़ी से या अन्य किसी ऐसे सहारे के साधन से काम को सुरक्षित रूप से नहीं किया जा सकता है तो विभिन्न चरणों में उपयुक्त और पर्याप्त मचान के प्रावधान सहित ऐसा किसी भी कार्य स्थल की पहुंच के लिए और उसकी सुरक्षा के लिए सुरक्षित साधन,
- किसी भी इमारत या अन्य संरचना को पूर्ण रूप से या उसके किसी भी हिस्से के विध्वंस के संबंध में सक्षम व्यक्ति द्वारा इमारत या अन्य संरचना या किसी इमारत के बड़े हिस्से के उठंगाने या अन्यथा द्वारा ढहने से होने वाले खतरे से बचने के लिए बरती जानी वाली सावधानी;
- सक्षम व्यक्ति के नियंत्रण में विस्फोटक का उपयोग या रखरखाव जिससे विस्फोट से या उड़ने वाली सामग्री से चोट का जोखिम उत्पन्न न हो;
- परिवहन उपकरणों जैसे इंजनों, ट्रकों, वैगन और अन्य इस प्रकार के वाहनों और खींचने वाली गाडि़यों और इस तरह के उपकरणों को ड्राइव या संचालित करने के लिए निर्माण स्थापना व रखरखाव व उपयोग के लिए सक्षम व्यक्तियों की नियुक्ति;
- समय-समय पर परीक्षण और जांच तथा जहां आवश्य हो ऊष्मा के उपचार सहित होइस्ट, उठाने के यंत्रों और उठाने के गियर को खडा करने, स्थापित करने, प्रयोग करने उनका रखरखाव करने में भार उठाते समय या उतारते समय बरती जाने वाली सावधानियां, व्यक्तियों की ढुलाई पर प्रतिबंध, और होइस्ट या अन्य भार उठाने के उपकरणों के लिए सक्षम व्यक्तियों की नियुक्ति;
- प्रत्येक स्थान जहां होइस्ट के प्रयोग द्वारा चढ़ाने या उतारने का कार्य किया जा रहा है, उठाने के उपकरण या उठाने के गियर कार्य जहां प्रगति पर है और नियोजित भवन श्रमिकों के लिए खतरनाक सभी छिद्र हो सकते हैं ऐसे प्रत्येक कार्यस्थल के लिए पर्याप्त और उपयुक्त प्रकाश व्यवस्था और उसकी पहुंच,
- किसी भी घिसाई, सफाई, छिड़काव या केवल सामग्री के जोड़-तोड़ के दौरान धूल, धुएं, गैसों और वाष्प की साँस लेने से रोकने के लिए की जाने वाली सावधानियों, और ऐसे प्रत्येक स्थल पर या सीमित स्थल पर पर्याप्त वायु संचार सुनिश्चित करने और बनाए रखने के लिए उठाए जाने वाले कदम;
- सामग्री या माल का ढेर लगाने या हटाने या भरने अथवा खाली करने या उनके रखरखाव के संबंध किए जाने वाले उपाय;
- प्रत्येक फ्लाई व्हील और मुख्य मोटर के प्रत्येक घूमने वाले भाग और प्रसारण या अन्य मशीनरी के प्रत्येक चलने वाले भाग को घेरने सहित मशीनरी की सुरक्षा, जब तक कि वह ऐसी स्थिति या ऐसे निर्माण में न हो जिससे कि प्रत्येक श्रमिक को काम करने के लिए उतनी सुरक्षित न हो जितनी उसे घेरे जाने के बाद होगीः
- संपीडि़त हवा द्वारा संचालित उपकरणों और औजारों सहित संयंत्र, का सुरक्षित रखरखाव और प्रयोगः
- आग के संबंध में बरती जाने वाली एहतियात;
- कार्यकर्ताओं द्वारा स्थानांतरित करने के लिए उठाये जा सकने वाले वजन की सीमा;
- किसी भी कार्यस्थल को या से पानी से श्रमिकों के सुरक्षित परिवहन और डूबने से बचाव के लिए साधनों का प्रावधानय
- ओवरहेड तारों और विद्युत मशीनरी व उपकरण सहित लाइव बिजली के तारों या उपकरणों से श्रमिकों को हो सकने वाले खतरों को रोकने के लिए किए जाने वाले उपायय
- जहां काम की विशेष प्रकृति या परिस्थितियों के कारण श्रमिकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक हो सुरक्षा नेट, सुरक्षा चादरें और सुरक्षा बेल्ट का रखनाय
- मचान, सीढ़ी और जीनों, उठाने के उपकरणों, रस्सियों, जंजीरों और सहायक सामानों, मिट्टी ढोने वाले उपकरणों और चल परिचालन उपकरणों के संबंध में पालन किये जाने के लिए मानकय
- ढेर पर ड्राइविंग, कंक्रीट के कार्यों, गर्म डामर, टार या इसी तरह की अन्य चीजों, तापरोधन कार्य, विध्वंस कार्य, उत्खनन, भूमिगत संनिर्माण और हैंडलिंग सामग्री के साथ कार्य के संबंध में की जाने वाली सावधानियांय
- सुरक्षा नीति, अर्थात्, संनिर्माण श्रमिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के लिए उठाए जाने वाले कदमों के संबंध में नीति, उसके लिए प्रशासनिक व्यवस्था और भवन संनिर्माण या अन्य संनिर्माण कार्य से संबंधित मामलों के लिए नियोक्ताओं और ठेकेदारों द्वारा तैयार की जाने वाली नीतिरू
- भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम, 1986 ;1986 का 63द्ध के तहत स्थापित भवन या अन्य संनिर्माण कार्य में अधिनियम के तहत कवर किसी भी वस्तु या प्रक्रिया के उपयोग के संबंध में भारतीय मानक ब्यूरो को प्रस्तुत की जाने वाली जानकारीः
- भवन श्रमिकों के लिए चिकित्सा सुविधाओं का के प्रावधान व अनुरक्षण;
- भवन संनिर्माण या अन्य संनिर्माण कार्य में किए जा रहे कार्यों में से किसी में भी काम कर रहे श्रमिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के विषय में कोई भी अन्य विषय।
41. सुरक्षा उपायों के लिए आदर्श नियमों का निर्धारण - केन्द्र सरकार, धारा 5 के तहत विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों पर विचार करने के बाद और धारा 40 में विनिर्दिष्ट विषयों में से सभी या किसी एक के संबंध में आदर्श नियम बना सकेगी और जहां ऐसे किसी भी मामले के संबंध में ऐसे आदर्श नियम बनाए जा चुके हैं, समुचित सरकार ऐसे मामले के संबंध में धारा 40 के तहत कोई भी नियम बनाते समय, जहां तक संभव होगा ऐसे आदर्श नियमों के अनुरूप नियम बनाएगी।
निरीक्षण स्टाफ
(42) महानिदेशक, मुख्य निरीक्षक और निरीक्षक की नियुक्ति -
- केन्द्र सरकार, अधिसूचना द्वारा सरकार के एक राजपत्रित अधिकारी की निरीक्षण महानिदेशक के रूप नियुक्ति करेगी जो निरीक्षण के मानक तय करने के लिए उत्तरदायी होगा, और उन सभी प्रतिष्ठानों के संबंध में भारत भर में एक निरीक्षक की शक्तियों का प्रयोग करेगा जिनके लिए केन्द्र सरकार समुचित सरकार है।
- राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, उस सरकार के एक राजपत्रित अधिकारी को भवन व संनिर्माण के निरीक्षण के लिए मुख्य निरीक्षक नियुक्त करेगी जो राज्य में इस अधिनियम के प्रावधानों के प्रभावी निष्पादन के लिए उत्तरदायी होगा और सम्पूर्ण राज्य में उन प्रतिष्ठानों के संबंध में इस अधिनियम के तहत एक निरीक्षक की शक्तियों का प्रयोग करेगा जिनके लिए राज्य सरकार समुचित सरकार है।
- समुचित सरकार, अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए अधिकारियों की ऐसी संख्या को निरीक्षकों के रूप में नियुक्त करेगी और उनकी ऐसी सीमा तय कर सकेगी जैसा वह उचित समझे।
- इस धारा के अधीन नियुक्त प्रत्येक निरीक्षक, जैसी भी स्थिति हो, महानिदेशक या मुख्य निरीक्षक के नियंत्रण के अधीन होगा, और इस अधिनियम के तहत महानिदेशक या मुख्य निरीक्षक के सामान्य नियंत्रण व पर्यवेक्षण के अधीन अपनी शक्तियों का प्रयोग करेगा तथा अपने कृत्यों का पालन करेगा।
- महानिदेशक, मुख्य निरीक्षक और प्रत्येक निरीक्षक को भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 21 के अर्थ में लोक सेवक होना समझा जाएगा।
(43) निरीक्षकों की शक्तियां -
-
इस संबंध में बनाए गए किसी भी नियम के अधीन, स्थानीय सीमाओं के भीतर जिसके लिए वह नियुक्त किया गया है, एक निरीक्षक निम्नलिखित कर सकेगा।
- सरकार की सेवा में व्यक्ति होने के नाते ऐसे सहायकों ;यदि कोई हों तोद्ध के साथ, या किसी स्थानीय या अन्य सार्वजनिक प्राधिकारी के साथ जैसा वह उचित समझे, किसी भी परिसर या स्थान में जहां भवन या अन्य संनिर्माण कार्य किया जा रहा है, इस अधिनियम के तहत रखे जाने के लिए आवश्यक किसी भी रजिस्टर या रिकॉर्ड या सूचना के निरीक्षण के उद्देश्य से, सभी उचित घंटों में प्रवेश कर सकेगा, और निरीक्षण के लिए उनकी मांग कर सकेगा;
- वह किसी भी व्यक्ति का निरीक्षण कर सकेगा जिसे वह किसी ऐसे परिसर या स्थान में पाता है और, उसके पास यह मानने के पर्याप्त कारण हैं कि वह, उसमें कार्यरत एक भवन श्रमिक है;
- किसी भवन श्रमिक को भवन या अन्य संनिर्माण कार्य देने वाले किसी भी व्यक्ति से, व्यक्तियों के नाम और पते के संबंध में कोई भी जानकारी देने के लिए, जिनको, जिनके लिए या जिन्हें भवन संनिर्माण या अन्य संनिर्माण कार्य किये जाने या लिये जाने या भवन संनिर्माण श्रमिक को भुगतान के संबंध मेंय कोई भी सूचना मांग सकेगा, जो उसकी शक्ति में शामिल है;
- इस तरह के रजिस्टर, मजदूरी के रिकॉर्ड या नोटिस की प्रतियां उनके अंश काले सकेगा या उन्हें जब्त कर सकेगा जैसा कि वह इस अधिनियम के तहत किए गए अपराध के संबंध में प्रासंगिक समझे जिसके लिए उसके पास विश्वास करने का पर्याप्त कारण है कि वह नियोक्ता द्वारा किया गया है; और
- ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग करेगा जैसा कि विहित किया जा सकेगा।
- इस धारा के प्रयोजनों के लिए, महानिदेशक या मुख्य निरीक्षक, जैसी भी स्थिति हो, विशेषज्ञों या ऐसी योग्यता और अनुभव वाली एजेंसियों को ऐसी शर्तों नियोजित कर सकेंगे जैसा कि विहित किया जा सकेगा।
- उप-धारा 1 के तहत किसी निरीक्षक द्वारा कोई भी आवश्यक जानकारी मांगे जाने या कोई भी दस्तावेज दिखाने के लिए किसी व्यक्ति को कानूनी तौर पर भारतीय दंड संहिता ;1860 का 45 की धारा 175 और धारा 176 के अर्थों में ऐसा करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य होना समझा जाएगा।
- दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) के प्रावधान, वहां तक जहां तक कि, इस संहिता की धारा 94 के तहत जारी किए गए एक वारंट के अधिकार के अधीन किए गए किसी भी खोज या जब्ती के लिए लागू नहीं होती, उप-धारा 1 के अधीन की गई इस तरह की खोज या जब्ती पर लागू नहीं होगी।
विशेष उपबंध
(44) नियोक्ताओं का दायित्व -
कोई भी नियोक्ता, सुरक्षा से संबंधित इस अधिनियम के प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित करने और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सभी आवश्यक व्यावहारिक कदम उठाने के लिए अपने प्रतिष्ठान में किसी भी भवन या अन्य संनिर्माण कार्य के दौरान लगातार व पर्याप्त पर्यवेक्षण प्रदान करने के लिए उत्तरदायी होगा।
टिप्पणी सुरक्षा से संबंधित इस अधिनियम के प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित करने और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सभी आवश्यक व्यावहारिक कदम उठाने के लिए अपने प्रतिष्ठान में किसी भी भवन या अन्य संनिर्माण कार्य के दौरान लगातार व पर्याप्त पर्यवेक्षण प्रदान करना नियोक्ता का उत्तरदायित्व है।
(45) मजदूरी व मुआवजे के भुगतान का उत्तरदायित्व -
- नियोक्ता, उसके द्वारा नियोजित प्रत्येक भवन संनिर्माण श्रमिक को मजदूरी के भुगतान के लिए उत्तरदायी होगा और वह ऐसी तारीख को या उससे पहले मजदूरी भुगतान करेगा जैसा कि विहित किया जा सकेगा।
- यदि कोई ठेकेदार उसके द्वारा नियोजित भवन श्रमिक को मुआवजे का भुगतान करने में विफल रहता है, जहां वह बकाया होने की स्थिति में ऐसा भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है, या कटौती करके भुगतान करता है तो भवन श्रमिक की मृत्यु या अक्षमता की स्थिति में, नियोक्ता, श्रमिक प्रतिपूर्ति अधिनियम, 1923 ;1923 का 8द्ध के प्रावधानों के अनुसार, मुआवजे की पूर्ण राशि या बकाए की अदत्त राशि का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा, और इस प्रकार भुगतान की गई राशि को ठेकेदार से, या तो ठेकेदार को देय किसी राशि से कटौती करके या किसी संविदा के तहत या ठेकेदार द्वारा देय ऋण के रूप मे वसूल करेगा।
टिप्पणी नियोक्ता उसके द्वारा नियोजित प्रत्येक भवन संनिर्माण कर्मकार को मजदूरी के भुगतान के लिए उत्तरदायी है और मजदूरी विहित तिथि को या उससे पहले भुगतान की जाएगी। यदि कोई ठेकेदार मुआवजे का भुगतान करने में विफल रहता है, तो भवन श्रमिक की मृत्यु या अक्षमता की स्थिति में, नियोक्ता, मुआवजे की पूर्ण राशि या बकाए की अदत्त राशि का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा, और इस प्रकार भुगतान की गई राशि को ठेकेदार से, वसूल करने का हकदार होगा।
(46) भवन संनिर्माण या अन्य संनिर्माण कार्य के प्रारंभ होने की सूचना -
- नियोक्ता, किसी भी भवन या अन्य संनिर्माण कार्य के प्रारंभ होने से कम से कम तीस दिन पहले, प्रस्तावित भवन संनिर्माण या अन्य संनिर्माण कार्य, निष्पादित किये जाने वाले क्षेत्र में क्षेत्राधिकार रखने वाले निरीक्षक को एक लिखित नोटिस भेजेगा या भिजवायेगा जिसमें निम्नलिखित शामिल होगें-
- उस स्थान का नाम व स्थिति जहां भवन या अन्य संनिर्माण कार्य निष्पादित किया जाना प्रस्तावित है;
- उस व्यक्ति का नाम व पता जो भवन या अन्य संनिर्माण कार्य निष्पादित करा रहा है;
- वह पता जहां भवन या अन्य संनिर्माण कार्य से संबंधित संचार भेजा जा सकेगा;
- शामिल कार्य की प्रकृति और किसी भी संयंत्र व मशीनरी सहित प्रदत्त सुविधाएं;
- भवन या अन्य संनिर्माण कार्य में प्रयोग किए जाने वाली विस्फोटकों, यदि कोई हों, के भंडारण की व्यवस्था;
- भवन या अन्य संनिर्माण कार्य के विभिन्न चरणों के दौरान नियोजित किए जाने वाले संभावित श्रमिकों की संख्या;
- उस व्यक्ति का नाम व पद जो कार्य स्थल पर भवन या अन्य संनिर्माण कार्य का समग्र प्रभारी होगा।
- कार्य की अनुमानित अवधि;
- ऐसे अन्य मामले जैसा कि विहित किया जा सकेगा।
- यदि उप-धारा (1) के तहत दिए गए किसी भी विवरण में कोई परिवर्तन होता है, तो, नियोक्ता दो दिनों के भीतर इस तरह के परिवर्तन की सूचना निरीक्षक को देगा।
- उप-धारा (1) का कोई भी प्रावधान भवन या अन्य संनिर्माण कार्य के ऐसे वर्ग के संबंध में लागू नहीं होगा जैसा कि समुचित सरकार अधिसूचना द्वारा उभरते हुए संनिर्माण के रूप में निर्दिष्ट करेगी।
दंड और प्रक्रिया
(47) सुरक्षा उपायों के संबंध में प्रावधानों के उल्लंघन के लिए दंड -
- यदि कोई व्यक्ति धारा 40 के तहत किसी नियम के प्रावधानों का उल्लंघन करता है, तो उसे तीन महीने तक की अवधि के लिए कारावास या दो हजार रुपए तक के अर्थदंड या दोनों से दंडित किया जा सकेगा, और सतत उल्लंघन के संबंध में ऐसे पहले उल्लंघन के बाद दोषी सिद्ध किए जाने के दिन से प्रतिदिन उल्लंघन पर एक सौ रुपए तक के अतिरिक्त अर्थदंड से दंडित किया जा सकेगा।
- यदि किसी व्यक्ति को उप-धारा (1) के तहत दंडनीय किसी अपराध के लिए दोषी ठहराया गया है उसी प्रावधान के अनुपालन का उल्लंघन या विफलता से जुड़े अपराध का पुनः दोषी पाया जाता है तो पुनः दोषी ठहराये जाने के बाद उसे छह महीने तक के कारावास या कम से कम पाँच सौ रुपए जो दो हजार रुपए तक हो सकता है या दोनों से दंडित किया जा सकेगा;
बशर्ते, इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, अपराध के लिए दोषी ठहराये जाने के दो वर्ष से पूर्व का कोई संज्ञान नहीं लिया जायेगा, जिसके लिए व्यक्ति को पुनः दोषी सिद्ध किया जा रहा है; परंतु यदि जुर्माना लगाने वाला प्राधिकारी, इस बात से संतुष्ट हो जाता है कि ऐसी असाधारण परिस्थितियां हैं जिनके कारण ऐसा निर्णय लिया जा सकता है उन परिस्थितियों को लिखित रूप में अंकित करते हुए, कम से कम पांच सौ रुपए का जुर्माना लगा सकता है।
टिप्पणी भवन एवं अन्य संनिर्माण श्रमिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए बनाए गए किसी भी नियम का उल्लंघन करने पर तीन माह तक का कारावास, या दो हजार रुपए तक का जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है। और सतत उल्लंघन के संबंध में ऐसे पहले उल्लंघन के बाद दोषी सिद्ध किए जाने के दिन से प्रतिदिन उल्लंघन पर एक सौ रुपए तक के अतिरिक्त अर्थदंड से दंडित किया जा सकेगा। ऊपर उद्धृत किसी भी अपराध के लिए दोषी ठहराये जाने के बाद उसी प्रावधान के अनुपालन का उल्लंघन या विफलता से जुड़े अपराध का पुनः दोषी पाया जाने पर छह महीने तक के कारावास या कम से कम पाँच सौ रुपए जो दो हजार रुपए तक हो सकता है या दोनों से दंडित किया जा सकेगा।
(48) भवन या या अन्य संनिर्माण कार्य के प्रारंभ होने की सूचना देने की विफलता के लिए दंड -
यदि कोई नियोक्ता, धारा 46 के तहत भवन या अन्य संनिर्माण कार्य के प्रारंभ होने की सूचना देने में विफल रहता है, तो वह तीन माह तक की कारावास की अवधि या दो हजार रुपए तक का जुर्माना या दोनों से दंडनीय होगा।
टिप्पणी भवन या या अन्य संनिर्माण कार्य के प्रारंभ होने की सूचना देने में विफल रहने पर, तीन माह तक की कारावास की अवधि या दो हजार रुपए तक का जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है।
(49) अवरोधों के लिए दंड -
- यदि कोई भी इस अधिनियम के तहत अपने कर्तव्यों के निर्वहन में किसी निरीक्षक को किसी प्रतिष्ठान के संबंध इस अधिनियम के तहत या इसके द्वारा अधिकृत किसी युक्तियुक्त सुविधा में प्रवेश या उसका निरीक्षण, परीक्षण, जांच या पड़ताल करने से बाधित करता है या इनकार करता है तो उसे तीन माह तक के कारावास या एक हजार रुपए का जुर्माना, या दोनों से दंडित किया जा सकेगा।
- कोई भी जानबूझकर, यदि किसी निरीक्षक द्वारा इस अधिनियम के अनुपालन में रखे गये किसी भी रजिस्टर या अन्य दस्तावेज मांगे जाने पर देने से मना करता है या ऐसा कोई भी कार्य करता है जिससे निरीक्षक को समाधान हो जाता है कि उसके कर्तव्यों के अनुपालन में किसी व्यक्ति को सामने आने से रोका जा रहा है या रोकने का प्रयास किया जा रहा है तो उसे तीन महीने तक का कारावास या एक हजार रुपए जुर्माना, या दोनों से दंडित किया जा सकेगा।
टिप्पणी यदि कोई भी व्यक्ति (i) अपने कर्तव्यों के निर्वहन में किसी निरीक्षक को किसी प्रतिष्ठान के संबंध किसी युक्तियुक्त सुविधा में प्रवेश या उसका निरीक्षण, परीक्षण, जांच या पड़ताल करने से बाधित करता है या इनकार करता है। ;पपद्ध किसी निरीक्षक द्वारा किसी भी रजिस्टर या अन्य दस्तावेज के मांगे जाने पर देने से मना करता है वह किसी व्यक्ति को सामने आने से रोकता है या रोकने के प्रयास करता है तो उसे तीन महीने तक का कारावास या एक हजार रुपए जुर्माना, या दोनों से दंडित किया जा सकेगा।
(50) अन्य अपराधों के लिए दंड -
- कोई भी व्यक्ति जो इस अधिनियम के किसी अन्य प्रावधान या उसके अधीन बनाए गए नियमों का उल्लंघन करता है या इस अधिनियम के किसी प्रावधान या उसके अधीन बनाए गए किसी भी नियम का अनुपालन करने में विफल रहता है, जहां इस तरह के उल्लंघन या विफलता के लिए कोई दंड नही बताया गया है, ऐसे प्रत्येक उल्लंघन या विफलता के लिए जैसी भी स्थिति हो एक हजार रूपये के जुर्माने से दंडित किया जा सकेगा, और उल्लंघन या विफलता जारी रखने के संबंध में, जैसी भी स्थिति हो, पहले ऐसे उल्लंघन का दोषी ठहराये जाने के बाद, उस दिन से जिस दिन से ऐसा उल्लंघन या विफलता दोहराई गई है से प्रति दिन सौ रूपये तक के अतिरिक्त जुर्माने से दंडित किया जा सकेगा।
- उप-धारा (1) के तहत दंड निम्नलिखित के द्वारा लगाया-जा सकेगा
- महानिदेशक द्वारा जहां उल्लंघन या विफलता के मामले में समुचित सरकार, केंद्र सरकार हैय और
- मुख्य निरीक्षक द्वारा जहां उल्लंघन या विफलता के मामले में समुचित सरकार, राज्य सरकार है।
- संबंधित व्यक्ति को निम्नलिखित के संबंध में लिखित में नोटिस दिये बिना कोई जुर्माना नहीं लगाया जा सकेगा-
- उसे उन आधारों को सूचित करना होगा जिन पर उस पर जुर्माना लगाया जाना प्रस्तावित है
- उसे ऐसे युक्तिसंगत समय में जैसा कि उसकी नोटिस में लगाए गए जुर्माने के साथ निर्दिष्ट किया जा सकेगा, लिखित रूप में प्रतिनिधित्व और यदि वह इच्छुक है तो इस मामले में उसको सुने जाने का समुचित अवसर करना होगा।
- महानिदेशक और मुख्य निरीक्षक को, इस अधिनियम में निहित किसी अन्य प्रावधान पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, नागरिक प्रक्रिया संहिता, 1908 ;1908 का 5द्ध के तहत इस धारा के अधीन किसी भी शक्ति का प्रयोग करते समय, एक सिविल कोर्ट के सभी अधिकार प्राप्त होगें, अर्थात्ः-
- बुलाने व गवाहों की उपस्थिति प्रवर्तित करने के संबंध में;
- किसी भी दस्तावेज की खोज और प्रस्तुत किए जाने के संबंध में;
- किसी न्यायालय या कार्यालय से सार्वजनिक रिकॉर्ड या तत्संबंधी प्रति मांगने के संबंध में;
- हलफनामों पर साक्ष्य प्राप्त करने के संबंध में; और
- गवाहों या दस्तावेजों की जांच के लिए कमीशन जारी करने के संबंध में।
- इस धारा में निहित कोई भी प्रावधान, किसी भी व्यक्ति के विरूद्ध इस अधिनियम के किसी भी अन्य प्रावधान के तहत या इस अधिनियम द्वारा दंडनीय किसी अन्य कानून के तहत किए गए किसी अपराध के लिए अभियोजित करने से निषेध कर सकेगा या जैसी भी स्थिति हो इस अधिनियम के तहत या किसी अन्य कानून के तहत इस धारा में किए गए अपराध के लिए किसी अन्य या उच्च जुर्माना या दंड से दंडित नहीं किया जा सकेगा। बशर्ते किसी भी व्यक्ति को एक ही अपराध के लिए दो बार सजा नहीं दी जा सकेगी।
टिप्पणी कोई भी व्यक्ति जो इस अधिनियम के किसी अन्य प्रावधान या उसके अधीन बनाए गए नियमों का उल्लंघन करता है या उनका अनुपालन करने में विफल रहता है, जहां इस तरह के उल्लंघन या विफलता के लिए कोई दंड नही बताया गया है, ऐसे प्रत्येक उल्लंघन या विफलता के लिए जैसी भी स्थिति हो एक हजार रूपये के जुर्माने से दंडित किया जा सकेगा। उल्लंघन या विफलता जारी रखने के संबंध में, जैसी भी स्थिति हो, पहले ऐसे उल्लंघन का दोषी ठहराये जाने के बाद, उस दिन से जिस दिन से ऐसा उल्लंघन या विफलता दोहराई गई है से प्रति दिन सौ रूपये तक के अतिरिक्त जुर्माने से दंडित किया जा सकेगा।
(51) अपील -
- धारा 50 के तहत कोई जुर्माना लगाए जाने से व्यथित कोई भी व्यक्ति निम्न के समक्ष अपील कर सकेगा-
- जहां जुर्माना महानिदेशक, द्वारा लगाया गया है केन्द्र सरकार;
- जहां जुर्माना मुख्य निरीक्षक, द्वारा लगाया गया है राज्य सरकार,
- ऐसा जुर्माना लगाए जाने की व्यक्ति को सूचित करने की तारीख से तीन माह की अवधि के भीतरः
- बशर्ते, केन्द्र सरकार या राज्य सरकार, जैसी भी स्थिति हो, को यदि यह समाधान हो जाता है कि अपीलार्थी को तीन महीने की उपरोक्त अवधि के भीतर अपील करने से पर्याप्त कारणों से रोका गया था तो, ऐसी अपील तीन महीने की अतिरिक्त अवधि में करने की अनुमति दे सकेगी।
- अपीलीय प्राधिकारी, अपीलार्थी को यदि वह ऐसा चाहता है, पक्ष रखने का अवसर देकर, और इस तरह की आगे की जांच करने के बाद, यदि कोई हो, जैसा वह आवश्यक समझे, उसकी पुष्टि, संशोधन या उचित ठहराने का आदेश जारी कर सकता है या अपील के विरूद्ध आदेश को उलट सकता है या ऐसे निर्देशों के साथ जैसा वह एक नये निर्णय के लिए उचित समझे मामले को वापस भेज सकता हैं।
टिप्पणी यदि कोई व्यक्ति धारा 50 के तहत कोई जुर्माना लगाए जाने से व्यथित है, तो वह महानिदेशक द्वारा लगाया गये जुर्माने के संबंध में केंद्र सरकार के समक्ष और मुख्य निरीक्षक द्वारा लगाये गये जुर्माने के संबंध में राज्य सरकार के समक्ष ऐसे व्यक्ति को जुर्माना लगाने के संबंध में सूचित किए जाने की तारीख से तीन महीने की अवधि के भीतर अपील कर सकता है। यदि अपीलार्थी को तीन महीने की उपरोक्त अवधि के भीतर अपील करने से पर्याप्त कारणों से रोका गया था तो, सरकार ऐसी अपील तीन महीने की अतिरिक्त अवधि में करने की अनुमति दे सकेगी।
(52) दंड की वसूली-
यदि धारा 50 के तहत किसी भी व्यक्ति पर लगाये गये किसी दंड का भुगतान नहीं किया जाता है, तो- महानिदेशक या, जैसी भी स्थिति हो, मुख्य निरीक्षक ऐसे बकाये को किसी पैसे से जो उसके नियंत्रण में है से उस व्यक्ति द्वारा देय राशि की कटौती कर सकता है; या
महानिदेशक या, जैसी भी स्थिति हो, मुख्य निरीक्षक इस तरह के व्यक्ति से संबंधित सामान को अपने नियंत्रण में करके या उसे बेच करके देय राशि की वसूली कर सकता है; या
यदि इस तरह के व्यक्ति से उपबंध ;पद्ध या उपबंध ;पपद्ध में बताए गए तरीके अनुसार राशि बरामद नहीं की जा सकती है, तो महानिदेशक या जैसी भी स्थिति हो, मुख्य निरीक्षक ऐसे व्यक्ति पर बकाया राशि का उल्लेख करते हुए अपने हस्ताक्षर द्वारा एक प्रमाण पत्र तैयार कर सकेगें और उसे उस जिले के कलेक्टर के पास भेजेंगे जिसमें ऐसे व्यक्ति की कोई भी संपत्ति है या वह वहां रहता है या अपने व्यवसाय का मालिक है और उसे संचालित करता है और उक्त कलेक्टर इस तरह के प्रमाण पत्र की रसीद प्राप्त करने पर उसमें निर्दिष्ट राशि को ऐसे व्यक्ति के भू-राजस्व के बकाये के रूप में वसूल करेगा।
(53) कंपनियों द्वारा अपराध -
- जहां इस अधिनियम के तहत किसी कंपनी द्वारा एक अपराध किया गया है, प्रत्येक व्यक्ति जो अपराध घटित होने के दौरान प्रभारी था, और कंपनी के कारोबार के संचालन में कंपनी के प्रति उत्तरदायी था व साथ ही कंपनी को अपराध का दोषी समझा जाएगा और उसके खिलाफ कार्यवाही की जा सकेगी और तदनुसार दंडित किया जा सकेगा;
- बशर्ते, इस उप-धारा में निहित कोई भी प्रावधान, किसी भी व्यक्ति को दण्डित नहीं कर सकेगा यदि वह साबित कर देता है अपराध उसकी जानकारी के बिना हुआ या उसने इस तरह के अपराध को घटित होने से रोकने के लिए सभी संभव प्रयास किया था।
- उप-धारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जहां, इस अधिनियम के तहत कोई भी अपराध किसी कंपनी द्वारा किया गया है और यह साबित हो जाता है कि यह अपराध किसी भी निदेशक, प्रबंधक, सचिव या कंपनी के अन्य अधिकारी की सहमति या मिलीभगत के साथ घटित किया गया है तो ऐसे निदेशक, प्रबंधक, सचिव या अन्य अधिकारी को उस अपराध का दोषी समझा जाएगा और उनके खिलाफ कार्यवाही करते तदनुसार दंडित किया जा सकेगा।
- स्पष्टीकरण - इस धारा के प्रयोजनों के लिए -
- ‘कंपनी’ से कोई भी कॉर्पोरेट निकाय अभिप्रेत है और इसमें फर्म या व्यक्ति या अन्य संगठन भी शामिल है; और
- एक फर्म के संबंध में ‘निदेशक’, से, फर्म में भागीदार होने से, अभिप्रेत है।
(54) अपराधों का संज्ञान -
- कोई भी अदालत निम्नलिखित द्वारा की गई शिकायत के अतिरिक्त इस अधिनियम के तहत दंडनीय किसी अपराध को संज्ञान में नहीं ले सकेगी-
- महानिदेशक या मुख्य निरीक्षक, द्वारा, या लिखित रूप में पूर्व स्वीकृत से की गई; या
- सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 ;1860 का 21द्ध के तहत पंजीकृत एक स्वैच्छिक संगठन के एक पदाधिकारी द्वारा की गई; या
- एक मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट या प्रथम श्रेणी के एक न्यायिक मजिस्ट्रेट के एक पदाधिकारी द्वारा जो इस अधिनियम के तहत दंडनीय किसी अपराध की सुनवाई करेगा
- एक मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट या प्रथम श्रेणी के एक न्यायिक मजिस्ट्रेट से अवर किसी न्यायालय को इस अधिनियम के तहत दंडनीय किसी अपराध की सुनवाई का अधिकार नहीं होगा।
(55) मुकदमों की सीमा -
कोई भी अदालत इस अधिनियम के तहत दंडनीय किसी अपराध को संज्ञान में नहीं ले सकेगी जब तक कि उसकी शिकायत महानिदेशक या मुख्य निरीक्षक, एक स्वैच्छिक संगठन के एक पदाधिकारी; या जैसी भी स्थिति हो संबंधित ट्रेड यूनियन के पदाधिकारी के संज्ञान में आने के भीतर न कर दी गई हो।
विविध
(56) शक्तियों का प्रत्यायोजन -
एक बोर्ड, सामान्य या विशेष आदेश द्वारा, अध्यक्ष या किसी अन्य सदस्य को या सचिव या किसी अन्य अधिकारी या बोर्ड के कर्मचारी को, ऐसी शर्तों और सीमाओं के अधीन, यदि कोई हो, जैसा कि आदेश में निर्दिष्ट किया जा सकेगा, इस अधिनियम के तहत अपनी उन शक्तियों और कर्तव्यों को प्रत्यायोजित करेगा जैसा कि वह आवश्यक समझे।
(57) रिटर्न-
प्रत्येक बोर्ड, समय-समय पर, केन्द्र सरकार को और राज्य सरकार इस तरह के रिटर्न प्रस्तुत करेगा जैसा उनके लिए आवश्यक हो।
(58) संनिर्माण श्रमिकों पर 1923 के अधिनियम 8 का लागू होना -
श्रमिक प्रतिपूर्ति अधिनियम, 1923 के प्रावधान के उस हद तक लागू होगें जहां तक भवन संनिर्माण श्रमिकों का नियोजन उस अधिनियम की दूसरी अनुसूची में शामिल किया गया था।
(59) सद्भाव से की गई कार्रवाई का संरक्षण -
- इस अधिनियम के अनुसरण या उसके अधीन बनाए गए किसी भी नियम या आदेश के अनुपालन के उद्देश्य से या सद्भाव से किये गये किसी भी कार्य या किसी भी व्यक्ति के विरूद्ध कोई वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही नहीं की जा सकेगी।
- इस अधिनियम के अनुसरण या उसके अधीन बनाए गए किसी भी नियम या आदेश के अनुपालन के उद्देश्य से या सद्भाव से किये गये किसी भी कार्य के कारण होने वाली किसी भी क्षति या क्षति की समभावना के विरूद्ध, सरकार, इस अधिनियम के तहत गठित किसी भी बोर्ड या समिति या इस तरह के बोर्ड के किसी भी सदस्य या अधिकारी या सरकार अथवा बोर्ड के किसी भी कर्मचारी या सरकार अथवा किसी बोर्ड अथवा समिति द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति पर अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही नहीं की जा सकेगी।
(60) केन्द्र सरकार की निर्देश देने की शक्ति-
इस अधिनियम के किसी भी प्रावधान का राज्य में निष्पादन करने के लिए केन्द्र सरकार किसी भी राज्य की सरकार को या बोर्ड को निर्देश दे सकेगी।
(61) कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति-
- यदि इस अधिनियम के प्रावधानों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है, तो केन्द्र सरकार, आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, ऐसे प्रावधान कर सकती है जो इस अधिनियम के प्रावधानों से असंगत नहीं होगें जैसा वह उस कठिनाई को दूर करने के लिए उचित या आवश्यक या समझे। बशर्ते, इस अधिनियम के प्रारंभ होने की तारीख से दो वर्ष की समाप्ति के बाद ऐसा कोई आदेश नहीं किया जा सकेगा।
- इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश, उसे करने के बाद जितनी जल्दी संभव हो सके, संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाएगा।
(62) नियम बनाने की शक्ति -
- समुचित सरकार, विशेषज्ञ समिति के साथ परामर्श के बाद, अधिसूचना द्वारा इस अधिनियम के प्रावधानों के निष्पादन के लिए नियम बना सकेगी।
- विशेष रूप से और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, इस तरह के नियम निम्नलिखित मामलों में, सभी या किसी के लिए प्रावधान कर सकेगेंः -
- केंद्रीय सलाहकार समिति और राज्य सलाहकार समितियों में विभिन्न हितों का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्यों के रूप में नियुक्त किए जाने वाले व्यक्तियों की संख्या, उनके पद की अवधि व सेवा की अन्य शर्तें, उनके कार्यों के निर्वहन की प्रक्रिया का पालन और धारा 3 की उप-धारा (3) या, जैसी भी स्थिति हो, धारा 4 की उप-धारा (3) के तहत रिक्तियों को भरने का तरीका;
- धारा 5 की उपधारा (2) के तहत अपनी बैठकों में भाग लेने के लिए विशेषज्ञ समिति के सदस्यों को भुगतान किये जा सकने वाले शुल्क और भत्ते;
- धारा 7 की उपधारा (2) के तहत एक प्रतिष्ठान के पंजीकरण के लिए आवेदन का प्रारूप, उसके लिए आरोपित शुल्क और उसमें दिया जाने वाला विवरण;
- पंजीकरण प्रमाण पत्र का प्रारूप, समय जिसके भीतर और वे शर्तें जिसके अधीन इस तरह का प्रमाण पत्र धारा 7 की उपधारा (3) के तहत जारी किया जा सकता है;
- धारा 7 की उपधारा (4) के तहत प्रारूप जिसमें स्वामित्व या प्रबंधन या अन्य ब्यौरे में परिवर्तन पंजीकरण अधिकारी को सूचित किया जाएगा,
- धारा 12 की उप-धारा (2) के तहत एक लाभार्थी के रूप में पंजीकरण के लिए आवेदन किये जाने का प्रपत्र;
- धारा 12 की उप-धारा (3) के तहत आवेदन साथ दस्तावेज और शुल्क;
- धारा 12 की उप-धारा (6) के तहत बोर्ड के सचिव बनाए जाने वाले रजिस्टर;
- धारा 14 की उप-धारा (2) के तहत दिए जा सकने वाले लाभ;
- धारा 15 के तहत वह प्रारूप जिसमें लाभार्थियों का पंजीकरण अनुरक्षित किया जायेगाः
- धारा 18 की उप-धारा (4) के तहत अध्यक्ष और बोर्ड के अन्य सदस्यों की नियुक्ति, वेतन व देय अन्य भत्ते, और आकस्मिक रिक्तियों को भरने के तरीके, नियम व शर्तों;
- धारा 19 की उप - धारा (3) के तहत सचिव और बोर्ड के अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए सेवा के नियम व शर्तें तथा वेतन व देय भत्ते;
- धारा 20 उप-धारा (1) के तहत बोर्ड की बैठक का समय व स्थान तथा ऐसी बैठक में कारोबार के संचालन के लिए आवश्यक कोरम सहित पालन की जाने वाली प्रक्रिया व नियम;
- धारा 22 की उपधारा (1) के खंड (c) के तहत गृह संनिर्माण के लिए ऋण या अग्रिम के रूप में देय राशि, खंड (e) के तहत शिक्षा सहायता खंड (f) के तहत देय चिकित्सा व्यय और वे व्यक्ति जो लाभार्थी पर निर्भर होगे और अन्य कल्याणकारी उपाय जो खंड (h) के तहत किए जा सकते हैं;
- धारा 22 की उप-धारा (3) के खंड (c) के तहत स्थानीय प्राधिकारियों और नियोक्ताओं को देय अनुदान सहायता की सीमा;
- धारा 25 के तहत वह प्रपत्र जिस पर और वह समय जिसके भीतर बोर्ड बजट तैयार करके सरकार को भेजेगा;
- धारा 26 के तहत वह प्रपत्र जिस पर और वह समय जिसके भीतर बोर्ड वार्षिक रिपोर्ट राज्य सरकार को और केन्द्र सरकार को प्रस्तुत करेगा;
- उप-धारा (1) के तहत लेखों के वार्षिक विवरण का प्रारूप, और धारा 27 की उप-धारा ;4द्ध के तहत वह तारीख जिसके पहले लेखा परीक्षक की रिपोर्ट के साथ लेखों की लेखा परीक्षित प्रतिलिपि प्रस्तुत करेगाः
- धारा 28 की उप-धारा (1) के तहत प्रदान की जाने वाली सामग्री और वह सीमा जिस तक और वे शर्तें जिनके अधीन उस उप-धारा के प्रावधान उस धारा की उप-धारा (2) के तहत संनिर्माण श्रमिकों पर लागू होगें;
- ऐसे रजिस्टर व रिकॉर्ड जो नियोक्ता द्वारा अनुरक्षित किए जाएगें और वह प्रारूप जिसमें ऐसे रजिस्टर व रिकॉर्ड अनुरक्षित किए जाएंगे और धारा 30 की उप-धारा (1) के तहत उसमें शामिल किया जाने वाले विवरण;
- धारा 30 की उप-धारा (2) के तहत प्रारूप और तरीका जिसमें नोटिस प्रदर्शित की जाएगी, और ब्यौरे जो उसमें शामिल किए जाएगें;
- धारा 30 की उप-धारा (3) के तहत भवन श्रमिकों को मजदूरी बही या मजदूरी पर्ची का निर्गम और उनमें प्रविष्टि करने का तरीका और मजदूरी बही या मजदूरी पर्ची मे उन्हें प्रमाणीकृत किये जाने का तरीका;
- धारा 33 के तहत प्रदान किए जाने वाले आवश्यक शौचालयों और मूत्रालयों के प्रकार;
- धारा 36 के तहत प्रदान की जाने वाली प्राथमिक चिकित्सा सुविधाएं,
- धारा 37 के खंड (a) के तहत प्रदान की जाने वाली कैंटीन सुविधाएं,
- धारा 37 के खंड (b) के तहत प्रदान किए जाने वाले कल्याणकारी उपाय;
- धारा 38 की उप-धारा (1) के तहत नियोक्ता और भवन संनिर्माण श्रमिकों के प्रतिनिधियों की संख्या और उस धारा की उप-धारा (2) के तहत सुरक्षा अधिकारियों की योग्यता और उनके द्वारा किये जाने वाले
- कर्तव्य; दुर्घटना की सूचना का प्रारूप, इस संबंध में उपलब्ध कराए जाने वाले अन्य मामले और वह समय जिसके भीतर ऐसी सूचना धारा 39 की उप-धारा (1) के तहत दी जाएगी;
- धारा 40 के तहत भवन संनिर्माण श्रमिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए बनाए जाने वाले नियम;
- धारा 43 और उप-धारा (1) के तहत किसी निरीक्षक द्वारा प्रयोग की जा सकने वाली शक्तियों और उसा धारा की उपधारा (2) के तहत नियोजित किए जा सकने वाले विशेषज्ञों या एजेंसियों के लिए आवश्यक योग्यता व अनुभव और वे शर्तें जिन पर ऐसे विशेषज्ञों या एजेंसियों को नियोजित किया जा सकेगा;
- तारीख जिस पर या जिसके पहले किसी भवन संनिर्माण श्रमिक को मजदूरी दी जाएगी;
- धारा 46 की उप-धारा (1) के खंड (i) के तहत वे विषय जिन्हें विहित करना आवश्यकता है;
- कोई भी अन्य विषय जिसे विहित करने की आवश्यकता है, या हो सकती है।
- इस अधिनियम के तहत केन्द्र सरकार द्वारा बनाये गये प्रत्येक नियम, बनाने के बाद जितनी जल्दी संभव हो सकेगा, संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष, सत्र में होने पर तीस दिन की अवधि के भीतर जिसमें एक सत्र या दो या उससे अधिक लगातार सत्र शामिल किए जा सकते हैं, रखा जाएगा और यदि, इस सत्र के तुरंत बाद आने वाले सत्र या पूर्वोक्त क्रमिक सत्रों की समाप्ति से पूर्व, दोनों सदन नियम में किसी संशोधन पर सहमत होते हैं या दोनों सदन इस बात से सहमत होते हैं कि नियम नहीं बनाया नहीं बनाया जाना चाहिए, के बाद, जैसा भी स्थिति हो, इस तरह के संशोधित रूप में प्रभावी होगा या निष्प्रभावी होगा; परंतु, ऐसा कोई भी संशोधन या निरसन पहले के नियम के तहत किये गये किसी निर्णय की वैधता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा।
- इस अधिनियम के तहत राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाने के बाद जितनी जल्दी संभव हो सकेगा, ऐसे विधानमंडल जिनमें दो सदन हैं प्रत्येक सदन में और जहां राज्य विधानमंडल में एक ही सदन है उस सदन के समक्ष, रखा जायेगा।
(63) कुछ कानूनों का बचाव -
इस अधिनियम का कोई भी प्रावधान किसी राज्य में कल्याणकारी योजनायें जो भवन एवं अन्य संनिर्माण श्रमिकों के लिए इस अधिनियम के तहत या इसके द्वारा प्रदान की जाने वाली योजनाओं से अधिक फायदेमंद होगीं, के संगत किसी कानून के संचालन को प्रभावित नहीं करेगा।
(64) निरसन और बचाव -
- भवन एवं अन्य संनिर्माण श्रमिक (रोजगार एवं सेवा शर्तों का विनियमन), तीसरा अध्यादेश, 1996 (1996 का अध्यादेश 25) इसके द्वारा निरसित किया जाता है।
- ऐसे निरसन के होते हुए भी, इस अध्यादेश के तहत की गई कार्रवाई कुोई भी किया गया कार्य या की गई कार्यवाही, इस अधिनियम के संगत प्रावधानों के तहत की गई या किया गया समझा जाएगा।